उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर का तोषखाना यानी खजाना कक्ष 54 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 18 अक्टूबर 2025 को फिर से खोला गया। यह ऐतिहासिक कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत उठाया गया, ताकि मंदिर के खजाने की पूरी जांच की जा सके। यह घटना न केवल धार्मिक समुदाय के लिए बल्कि राजनीतिक हलकों के लिए भी चर्चा का विषय बन गई है।
मंदिर का तोषखाना 1971 में सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था। हाल ही में अदालत के आदेश के बाद इसे पुनः खोला गया, जिसमें एक लकड़ी का संदूक बरामद हुआ है। विशेषज्ञों द्वारा इसकी जांच की जा रही है और मंदिर प्रशासन तथा पुलिस इसे लेकर सतर्क हैं। इस प्रक्रिया में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम को भी शामिल किया गया है। 54 वर्षों बाद इस ऐतिहासिक तोषखाने के खुलने से श्रद्धालुओं में गहरी रुचि पैदा हुई है और मथुरा के इस धार्मिक स्थल पर नई ऐतिहासिक जानकारियों की संभावना से उत्साह बढ़ गया है।
इस मामले पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है और इतना लालच ठीक नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कम-से-कम मंदिरों के खजाने तो छोड़ दें। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है और मंदिरों के खजाने को लेकर संभावित विवाद को उजागर करता है।
वहीं, गोस्वामी समाज ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि समिति की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर संदेह है और खजाने से संबंधित प्रक्रिया में उनकी भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसके जवाब में एडीएम पंकज वर्मा ने कहा कि खजाना कक्ष खोलने की पूरी प्रक्रिया उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार और अधिकारियों की निगरानी में की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान किया जा रहा है।
खजाने की जांच के लिए तहखाना शनिवार और रविवार दोनों दिन खुला रहा। जांच टीमों ने पांच घंटे से अधिक समय तक उसमें रखे सामान की समीक्षा की। सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे और जांच की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की गई। अब तक कोई गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली है।
इस ऐतिहासिक घटना ने मथुरा के बांके बिहारी मंदिर को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। जहां एक ओर भक्तों में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक और सामाजिक विवाद भी सामने आ रहे हैं। आगे की जांच और खुलासे इस रहस्य को और भी रोचक बना सकते हैं और मंदिर के इतिहास में नई जानकारियों को उजागर कर सकते हैं।




