उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेशन विवाद: सीएम योगी का आह्वान — “हलाल सर्टिफिकेशन वाले उत्पाद न खरीदें”

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की जनता से खास अपील की है कि वे हलाल सर्टिफिकेशन वाले उत्पादों को खरीदने से बचें, क्योंकि उनके अनुसार इस तरह के प्रमाणन से होने वाली आय का दुरुपयोग देशविरोधी गतिविधियों जैसे आतंकवाद, लव‑जिहाद और धर्मांतरण में किया जाता है। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार ने हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर सख्त रुख अपनाया है और ऐसे प्रमाणन पर रोक लगाई गई है। उन्होंने जनता से सामान खरीदते समय जीएसटी और लाइसेंस की जांच करने की भी हिदायत दी, ताकि पैसों का गलत इस्तेमाल रोका जा सके।

सीएम ने अपने बयान में यह भी कहा कि हलाल सर्टिफिकेशन से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा देश और समाज के लिए हानिकारक गतिविधियों में जाता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने इस व्यापार का आंकड़ा भी पेश किया और कहा कि हलाल प्रमाणन के कारण लगभग ₹25,000 करोड़ का कारोबार होता है। उनका यह रुख सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दरअसल, यह मामला नया नहीं है। यूपी सरकार ने पहले भी 2023 में हलाल प्रमाणित खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाई थी। उस समय प्रशासन ने उन कंपनियों और संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिन पर अवैध हलाल प्रमाणन देने का आरोप था। इस कदम को लेकर कानूनी और सार्वजनिक बहस भी हुई थी, जिसमें आलोचकों ने इसे धार्मिक विभाजन बढ़ाने वाला कदम बताया, जबकि सरकार का कहना था कि यह राष्ट्रीय एकता और सार्वजनिक हित के लिए जरूरी था।

सीएम के इस ताजा बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज रही। विपक्षी नेताओं ने इसे धर्म आधारित विभाजन बढ़ाने वाला कदम करार दिया, जबकि समर्थक इसे स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और देशविरोधी धन प्रवाह रोकने वाला कदम बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी विशेष प्रमाणीकरण पर पाबंदी लगाने से व्यापार, निर्यात और उपभोक्ता संबंधी प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है। इसके बावजूद, उपभोक्ता‑सुरक्षा पक्षधर सुझाव दे रहे हैं कि कंपनियों की पारदर्शिता और टैक्स रसीदों की प्रक्रियाओं को कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए।

फिलहाल, प्रशासन और व्यापारिक समुदाय इस नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन और प्रभावों पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि हलाल प्रमाणन पर इस तरह के कदम के सामाजिक, आर्थिक और संवैधानिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नियम पारदर्शी और संतुलित होने चाहिए। इस कदम से उपभोक्ताओं, व्यापारियों और समाज को सही जानकारी और सुरक्षा मिले, यही सरकार का उद्देश्य बताया जा रहा है।

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