वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया कि सरकार ने अब तक करोड़ों लोगों को घोर गरीबी से बाहर निकाला है। दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में केंद्र सरकार की नीतियों के परिणामस्वरूप “2.5 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाया गया।” हालांकि, आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, यह संख्या वास्तव में लगभग 25 करोड़ के आसपास है। नीति आयोग (NITI Aayog) की नवीनतम राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (National Multidimensional Poverty Index) रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013–14 से 2022–23 के बीच भारत में गरीबी दर 29.17 प्रतिशत से घटकर 11.28 प्रतिशत रह गई है। इस अवधि में लगभग 24.82 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर निकले, जिसे सरकार एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में लोगों की जीवनशैली, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना, जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, हर घर जल और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी योजनाओं ने गरीबी उन्मूलन में निर्णायक भूमिका निभाई है। वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने संबोधन में कहा कि इन योजनाओं ने निचले तबके के नागरिकों को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त किया, बल्कि सामाजिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनाया है।
वहीं, कुछ आर्थिक विशेषज्ञों ने इस दावे की गणना पद्धति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गरीबी का मूल्यांकन अलग-अलग तरीकों से किया जाता है, इसलिए आंकड़ों में अंतर हो सकता है। आलोचकों का यह भी तर्क है कि वास्तविक गरीबी का आकलन तभी पूरी तरह संभव है जब सभी सामाजिक और आर्थिक कारकों को समान रूप से शामिल किया जाए। फिर भी, नीति आयोग की रिपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र ने भी सकारात्मक रुझान के रूप में स्वीकार किया है।
कुल मिलाकर, निर्मला सीतारमण का यह बयान भारत की आर्थिक नीति और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों की उपलब्धियों को उजागर करता है। चाहे संख्या 2.5 करोड़ हो या 25 करोड़, तथ्य यह है कि बीते दशक में भारत ने गरीबी उन्मूलन की दिशा में ठोस प्रगति की है, और यह विकास सरकार की योजनाओं, प्रशासनिक पारदर्शिता और जन-सहभागिता का संयुक्त परिणाम है।




