‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष: पूरे देश में गूंजेगा राष्ट्र का जयगान, दिल्ली में पीएम मोदी करेंगे स्मरणोत्सव का उद्घाटन, बीजेपी ने बनाया भव्य आयोजन का खाका

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नई दिल्ली , भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी ने इसे राष्ट्रव्यापी उत्सव के रूप में मनाने का फैसला किया है। देशभर में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जहां यह अमर गीत एक साथ गूंजेगा। बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने प्रेस वार्ता में बताया कि पार्टी ने इस ऐतिहासिक अवसर को “भारत की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय अस्मिता” का पर्व बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम बंगाल की संस्कृति और गौरव का प्रतीक है, और पूरे देश के लिए गर्व की बात है।”

केंद्र सरकार का निर्णय

1 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर इसे उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। सरकार ने आवाहन किया है कि 7 नवंबर 2025 को, जब इस गीत के 150 वर्ष पूरे होंगे, तब पूरे देश में सामूहिक रूप से इसका गायन किया जाए। केंद्र सरकार की पहल पर देश के सभी राज्यों, जिलों, और संस्थानों में इस गीत का एक साथ गायन आयोजित किया जाएगा।

बीजेपी का राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी घोषणा की है कि पार्टी 7 नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक देशभर में वंदे मातरम गायन और जनजागरण के अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करेगी। इन आयोजनों का उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, त्याग और मातृभूमि की भावना से जोड़ना बताया गया है।

7 नवंबर से होगी शुरुआत

वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रमों की भव्य शुरुआत 7 नवंबर 2025 से होगी। यह कार्यक्रम देश के 150 प्रमुख स्थलों पर आयोजित होंगे — कारगिल वार मेमोरियल से लेकर अंडमान के सेलुलर जेल, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और आगरा, और तमिलनाडु के वेल्लोर फोर्ट व आरोड़ तक। दिल्ली में होने वाले स्मरणोत्सव के मुख्य कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, जबकि बिहार के आयोजन में गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति रहेगी।

बंगाल से विशेष जुड़ाव और राजनीतिक दृष्टि

बीजेपी के इस अभियान को सांस्कृतिक और राजनीतिक, दोनों दृष्टियों से देखा जा रहा है। ‘वंदे मातरम’ की रचना बंगाल के महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी। देश के कई स्वतंत्रता सेनानी वन्दे मातरम कहते हुए उन्होंने फांसी के फंदों को चूमा और विदेशी आक्रांताओं के दमन को भी सहा l वन्दे मातरम अग्रेजों से मुक्ति का एक बड़ा मंत्र बनकर उभरा ,स्वदेशी आंदोलन का भी रहा नारा l राजनीतिक हलकों में इस पहल को आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बीजेपी का मानना है कि “बंगाल की अस्मिता और भारत की आत्मा—दोनों की जड़ें वंदे मातरम में हैं।”

देशभर में जनभागीदारी

केंद्र और राज्य स्तर पर स्कूलों, कॉलेजों, कार्यालयों, और सांस्कृतिक संस्थानों में निबंध प्रतियोगिताएं, वंदे मातरम यात्राएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। यह अभियान 8 नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक चलेगा।

‘वंदे मातरम’—एक गीत नहीं, राष्ट्र का प्रण है।

150 वर्ष बाद भी इसकी हर पंक्ति भारत की आत्मा में गूंजती है—

“सुजलां सुफलां, मलयजशीतलाम्…”

Reported by: निखिल रस्तोगी 

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