दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार धमाके की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह कोई सामान्य विस्फोट नहीं, बल्कि एक संगठित आतंकी साजिश का हिस्सा था। जांच में सामने आया है कि इस धमाके के पीछे पुलवामा का रहने वाला डॉक्टर उमर उन्नबी उर्फ उमर मोहम्मद शामिल था, जिसने दिल्ली को दिसंबर में 26/11 जैसे हमले से दहलाने की योजना बनाई थी। लाल किले के समीप खड़ी एक कार में हुए विस्फोट ने पूरे इलाके को हिला दिया था, जिसमें कई लोग घायल हुए और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मलबे से महत्वपूर्ण सुराग जुटाए, जिनसे साजिश की गहराई का पता चला।
फॉरेंसिक जांच में मिले डीएनए नमूनों की तुलना के बाद यह पुष्टि हुई कि धमाका करने वाला शख्स डॉक्टर उमर ही था। बताया जा रहा है कि उमर पुलवामा का रहने वाला था और कुछ समय पहले फरीदाबाद में अल फलाह मेडिकल कॉलेज में बतौर डॉक्टर कार्यरत था। एजेंसियों ने जब उमर के डिजिटल डिवाइस और यात्रा रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि उसका संपर्क तुर्की (अंकारा) में सक्रिय कुछ हैंडलरों से था। सूत्रों के मुताबिक, यह नेटवर्क “Ukasa” नामक कोड से जुड़े विदेशी हैंडलर द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो भारत में सक्रिय मॉड्यूल को दिशा दे रहा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि उमर और उसके साथियों ने तीन अलग-अलग वाहनों में विस्फोटक सामग्री तैयार की थी। इन गाड़ियों के ज़रिए दिसंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली में कई स्थानों पर धमाके करने की योजना थी। सूत्रों का दावा है कि उनका लक्ष्य देश की राजधानी को उसी तरह दहलाना था, जैसा 2008 में मुंबई पर हुए 26/11 हमले में हुआ था। एजेंसियां यह भी मान रही हैं कि हमले की तारीख 6 दिसंबर के आसपास रखी गई थी, जिससे सांप्रदायिक तनाव भड़काया जा सके।
इस मॉड्यूल में कुछ और डॉक्टरों व तकनीकी पृष्ठभूमि के युवाओं की भूमिका भी सामने आई है। फरीदाबाद और हरियाणा के अन्य हिस्सों से मिली विस्फोटक सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट इसी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत दे रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और इंटेलिजेंस ब्यूरो संयुक्त रूप से पूरे नेटवर्क की तह तक जाने में जुटे हैं।
सरकार ने हमले के बाद दिल्ली समेत देशभर के प्रमुख शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एजेंसियों को निर्देश दिया है कि विदेशी हैंडलरों और फंडिंग स्रोतों तक पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाया जाए। इस बीच अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है और पीड़ित परिवारों को सरकार द्वारा सहायता राशि देने की घोषणा की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि यह साजिश फिलहाल शुरुआती चरण में ही नाकाम कर दी गई, लेकिन जांच से यह साफ है कि दिल्ली को बड़े आतंकी हमले से दहलाने की तैयारी पूरी थी। अब एजेंसियों का ध्यान नेटवर्क के बाकी सदस्यों, डिजिटल फंडिंग चैनलों और विदेश में बैठे मास्टरमाइंड्स तक पहुंचने पर केंद्रित है।




