बीएसएफ का 61वां स्थापना दिवस: गृह मंत्री का सख्त संदेश— ‘लोकतंत्र की रक्षा हमारी पहली जिम्मेदारी’

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बीएसएफ के 61वें रेजिंग डे पर आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और आंतरिक स्थिरता के मुद्दों पर सरकार की सख्त नीति को दोहराया। गुजरात के भुज स्थित बीएसएफ कैंपस में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत परेड और बल की शौर्य परंपरा को दर्शाने वाले समारोह से हुई। अमित शाह ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद जवानों को नमन किया और कहा कि बीएसएफ की वर्दी देश की सुरक्षा की पहली और सबसे मजबूत ढाल है।

अपने संबोधन में गृह मंत्री ने घुसपैठ के मुद्दे पर बेहद कड़े शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार देश की सीमाओं पर अवैध प्रवेश को किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा, “हमारा संकल्प है कि देश में मौजूद एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकालेंगे। यह केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की रक्षा का अभियान है।” इस दौरान उन्होंने सीमा क्षेत्रों में तकनीकी आधुनिकीकरण, निगरानी तंत्र की मजबूती और तेज़ प्रतिक्रिया क्षमता को लेकर सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

अमित शाह ने SIR प्रक्रिया (जिसे पहचान सत्यापन और दस्तावेज़ीकरण से जोड़कर देखा जाता है) को लेकर भी स्पष्ट किया कि यह पहल देश की लोकतांत्रिक संरचना और सुरक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है। उनका कहना था कि लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से नहीं, बल्कि नागरिकों और राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने से भी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में घुसपैठ और अवैध गतिविधियों का नेटवर्क लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है, इसलिए सरकार इसे किसी भी कीमत पर रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

गृह मंत्री ने हाल के महीनों में बीएसएफ द्वारा किए गए विभिन्न अभियानों और चुनौतियों का उल्लेख करते हुए जवानों की बहादुरी की सराहना की। उन्होंने कहा कि बीएसएफ न केवल दुश्मन की हर हरकत पर कड़ी निगाह बनाए हुए है, बल्कि ड्रोन गतिविधियों, तस्करी, सीमा पार से होने वाली फायरिंग, और घुसपैठ के प्रयासों को निष्फल करने में भी लगातार सफल हो रही है। उन्होंने बताया कि सरकार की नीति “ज़ीरो टॉलरेंस” पर आधारित है, और बीएसएफ ने हर मोर्चे पर इस सिद्धांत को व्यवहार में उतारा है।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने नक्सलवाद, सीमाई अपराध, और आतंकवाद के खिलाफ अभियान को नई गति दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक नक्सलवाद को निर्णायक रूप से कमजोर करना और प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करना है। उन्होंने सुरक्षा बलों के मनोबल और कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए किए जा रहे सुधारों की जानकारी भी साझा की, जिनमें आधुनिक हथियार, प्रशिक्षण और सड़क–आधारभूत ढांचे का विस्तार शामिल है।

बीएसएफ रेजिंग डे का आयोजन इस वर्ष बेहद भव्य रहा, जिसमें विशेष परेड, महिला राइफल टीमों का प्रदर्शन, बैंड के मार्च-पास्ट और विभिन्न कौशल प्रदर्शन शामिल थे। देश के विभिन्न हिस्सों से आए गणमान्य व्यक्तियों और अधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। समारोह ने न केवल भारत की सीमा सुरक्षा में बीएसएफ की भूमिका को उजागर किया, बल्कि यह संदेश भी स्पष्ट किया कि सरकार और सुरक्षा बल एकजुट होकर हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं।

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