प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 शिखर सम्मेलन में अपने उद्घाटन संबोधन के दौरान वैश्विक विकास की दिशा में चार नए प्रस्ताव रखकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि यह समय है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ग्लोबल साउथ की वास्तविक आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। पीएम मोदी ने इस मंच को सहयोग, समावेश और स्थायी विकास की दिशा में ठोस कदम उठाने का अवसर बताया और भारत की “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” की सोच को वैश्विक समाधान के रूप में प्रस्तुत किया।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने पहला प्रस्ताव ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपॉज़िटरी बनाने का रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न समुदायों में सदियों से संचित पारंपरिक ज्ञान में स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली से जुड़े कई समाधान छिपे हैं। यह रिपॉज़िटरी दुनिया के विभिन्न देशों के पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने, साझा करने और वैज्ञानिक रूप से उपयोग में लाने में सहायक होगी। इससे स्थानीय समुदायों के ज्ञान का सम्मान भी होगा और वैश्विक स्तर पर नई संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे।
दूसरा महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव प्रधानमंत्री ने अफ्रीका स्किल्स मल्टिप्लायर इनिशिएटिव का रखा। इसका उद्देश्य अफ्रीकी देशों में युवाओं के लिए कौशल-विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है। मोदी ने बताया कि अफ्रीका में युवाओं की बड़ी आबादी है और उन्हें सही दिशा में कौशल एवं तकनीकी प्रशिक्षण देने से वहां की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है। यह पहल न केवल रोजगार को बढ़ाएगी, बल्कि स्थानीय उद्योगों और उद्यमिता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
प्रधानमंत्री का तीसरा प्रस्ताव वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा था, जिसके तहत उन्होंने ग्लोबल हेल्थकेयर रिस्पॉन्स टीम बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में महामारी और प्राकृतिक आपदाओं ने दिखा दिया है कि दुनिया को एक तेज, संगठित और प्रशिक्षित चिकित्सा प्रतिक्रिया बल की आवश्यकता है। यह टीम संकट के दौरान तुरंत सहायता, विशेषज्ञता और आपात चिकित्सा सेवाएँ प्रदान कर सकेगी। इससे भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य आपदा से निपटना अधिक प्रभावी और समन्वित हो सकेगा।
चौथा प्रस्ताव प्रधानमंत्री मोदी ने ड्रग–टेरर नेक्सस के खिलाफ सामूहिक अभियान के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी अब केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह आतंकवाद को वित्तीय समर्थन देने का एक बड़ा माध्यम बन चुकी है। उन्होंने देशों से आग्रह किया कि ड्रग-टेरर नेटवर्क को खत्म करने के लिए साझा रणनीति, कठोर निगरानी तंत्र और बेहतर खुफिया सहयोग की आवश्यकता है। इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय पहल वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक बताई गई।
इन चार प्रस्तावों के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल वर्तमान चुनौतियों की ओर दुनिया का ध्यान खींचा, बल्कि उनके समाधान के लिए व्यवहारिक और व्यापक मार्ग भी सुझाए। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा प्रस्तुत ये पहलें आने वाले वर्षों में जी20 की नीतियों को अधिक समावेशी, न्यायपूर्ण और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मोदी का यह संदेश स्पष्ट था कि दुनिया तभी आगे बढ़ सकती है जब वैश्विक उत्तर और दक्षिण के बीच संतुलित साझेदारी और सामूहिक जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए।




