लखनऊ में आयोजित ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भगवद्गीता आज के उलझन से भरे विश्व के लिए स्पष्ट समाधान प्रस्तुत करती है। उनके अनुसार, दुनिया जिस नैतिक भ्रम, तनाव और संघर्ष के दौर से गुजर रही है, उसका स्थायी उपचार गीता के मूल सिद्धांतों—कर्म, धर्म और आत्म-नियंत्रण—में निहित है। भागवत ने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन करने वाला ऐसा शास्त्र है जो हर युग और हर परिस्थिति में मनुष्य को सही दिशा दिखाता है।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गीता मानव को स्थिरता, स्पष्टता और धैर्य प्रदान करती है, जो आज के चुनौतीपूर्ण वैश्विक वातावरण में अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन हमेशा से मानवता-केन्द्री दृष्टिकोण रखता आया है, और आज भी दुनिया भारत की ओर इसलिए देख रही है क्योंकि वह ‘एकात्म मानवतावाद’ को जीवन का आधार मानता है—ऐसा विचार जो समाज, व्यक्ति और विश्व को एक सूत्र में बाँधता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सभ्यता ने दुनिया के किसी भी हिस्से में जाकर शोषण नहीं किया, बल्कि अपनी सांस्कृतिक ऊष्मा और सकारात्मक दृष्टिकोण से योगदान देने का प्रयास किया है।
कार्यक्रम ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ को ग्लोबल गीता इंस्पिरेशन अभियान के तहत आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य गीता के संदेश को समाज के अधिक व्यापक वर्ग तक पहुँचाना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए और आयोजन को श्री कृष्ण कृपा एवं जियो गीता परिवार द्वारा सहयोग प्राप्त था। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद थी, जबकि कई प्रमुख राजनेताओं और विशिष्ट अतिथियों को भी आमंत्रित किया गया था।
लखनऊ कार्यक्रम के बाद मोहन भागवत की यात्रा में वि·श्व संवाद केंद्र के जियामऊ कार्यालय का दौरा और तत्पश्चात अयोध्या जाने की योजना भी शामिल थी, जहाँ वे विभिन्न बैठकों और सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। भागवत का यह संपूर्ण संदेश इस विचार पर केंद्रित रहा कि गीता का ज्ञान वर्तमान समय में केवल आध्यात्मिकता का नहीं, बल्कि वैश्विक समाधान का मार्ग भी दिखाता है, और भारत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




