हाल ही में आए भीषण तूफान Ditwah ने प्रभावित देश में भारी तबाही मचाई है। तेज हवाओं, मूसलाधार बारिश और बाढ़ जैसे हालातों के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में घर, सड़कें और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, वहीं हजारों लोग बेघर होने को मजबूर हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बाद भारत ने एक बार फिर मानवीय संवेदनशीलता और क्षेत्रीय जिम्मेदारी का परिचय देते हुए प्रभावित देश की सहायता के लिए तुरंत कदम बढ़ाए हैं।
भारत सरकार ने आपदा के तुरंत बाद राहत और बचाव सामग्री भेजने का फैसला किया। इसमें खाद्य सामग्री, दवाइयां, टेंट, स्वच्छ पेयजल और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन और चिकित्सा सहायता के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती पर भी विचार किया गया, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस मौके पर भारत की विदेश नीति की मूल भावना को दोहराते हुए कहा कि भारत हमेशा अपने पड़ोसियों के साथ खड़ा रहा है और भविष्य में भी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति केवल कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि संकट के समय ज़मीनी स्तर पर मदद के जरिए दिखाई देने वाली प्रतिबद्धता है। जयशंकर ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय सीमाएं मायने नहीं रखतीं और मानवता सबसे ऊपर होती है।
भारत की यह पहल न केवल मानवीय सहायता का उदाहरण है, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और आपसी विश्वास को भी मजबूत करती है। इससे पहले भी भारत ने भूकंप, बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पड़ोसी देशों और मित्र राष्ट्रों की मदद की है। Ditwah तूफान के बाद दी गई यह सहायता उसी निरंतर परंपरा का हिस्सा मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की त्वरित प्रतिक्रिया और सहयोग से प्रभावित देश में राहत कार्यों को गति मिलेगी और दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे। संकट की इस घड़ी में भारत की भूमिका एक जिम्मेदार और भरोसेमंद पड़ोसी के रूप में सामने आई है।




