ईरान में एक बार फिर बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन भड़क उठे हैं। राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इन प्रदर्शनों को उस समय और तेज़ी मिली जब निर्वासित युवराज रज़ा पहलवी ने विदेश से ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने की अपील की। उनकी इस अपील के बाद हजारों लोग देर रात घरों की छतों, गलियों और सड़कों पर उतर आए और सरकार व सर्वोच्च नेता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक आज़ादी, बेहतर जीवन और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ खुलकर अपना गुस्सा जाहिर किया।
ईरान में जारी विरोध की मुख्य वजह देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति मानी जा रही है। महंगाई, बेरोजगारी और ईरानी मुद्रा रियाल की लगातार गिरती कीमत से आम जनता परेशान है। हाल के महीनों में रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं, जिससे जनता में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। यही आक्रोश अब सड़कों पर खुलकर सामने आ रहा है और प्रदर्शन धीरे-धीरे राजनीतिक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
निर्वासित युवराज रज़ा पहलवी की अपील के बाद तेहरान, मशहद, इस्फहान और कई अन्य शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए। कई इलाकों में बाजार बंद रहे और ट्रैफिक ठप हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और इस्लामिक शासन व्यवस्था के खिलाफ खुलकर नाराज़गी जाहिर की। कुछ जगहों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए।
स्थिति को काबू में करने के लिए ईरानी सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दीं। इससे आम लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग टूट गया है। इंटरनेट निगरानी एजेंसियों के अनुसार, कई इलाकों में पूरी तरह डिजिटल ब्लैकआउट जैसी स्थिति बना दी गई है ताकि प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो बाहर न जा सकें और लोगों को संगठित होने से रोका जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह आंदोलन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए व्यापक प्रदर्शनों के बाद सबसे बड़ा जनआंदोलन माना जा रहा है। फिलहाल ईरान में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और आने वाले दिनों में प्रदर्शन और तेज होने की आशंका जताई जा रही है। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव से देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आने की संभावना देखी जा रही है।




