ईरान में जारी भीषण विरोध-प्रदर्शनों ने अब हिंसक रूप ले लिया है। राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में आर्थिक बदहाली, महंगाई, बेरोज़गारी और शासन से नाराज़गी के चलते लोग सड़कों पर उतर आए हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि प्रदर्शनकारी सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और सरकारी संस्थानों को निशाना बना रहे हैं। हालिया घटनाओं में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाई हैं, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
स्थानीय अस्पतालों और डॉक्टरों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, अब तक कम से कम 217 लोगों की मौत हो चुकी है। तेहरान के कई बड़े अस्पतालों में गंभीर रूप से घायल प्रदर्शनकारियों को लाया गया, जिनमें से बड़ी संख्या में युवाओं और छात्रों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि अधिकांश लोगों की मौत सीने, पेट और सिर में गोली लगने से हुई है, जिससे साफ है कि भीड़ को तितर-बितर करने के बजाय सीधे फायरिंग की गई।
सरकार ने स्थिति को काबू में करने के लिए इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क को भी बंद कर दिया है, ताकि देश-विदेश तक सही जानकारी न पहुंच सके। कई इलाकों में सड़कों को बंद कर दिया गया है और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कर दी गई है। प्रदर्शनकारी सरकारी इमारतों पर कब्जा करने, आगजनी करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे कदम उठा रहे हैं, जिससे हालात और ज्यादा बेकाबू होते जा रहे हैं।
प्रदर्शन पिछले कई दिनों से लगातार जारी हैं और अब ये सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि राजनीतिक असंतोष और शासन-विरोधी आंदोलन में बदल चुके हैं। युवा वर्ग और आम नागरिकों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था ने उनकी आवाज दबा दी है और अब बदलाव जरूरी हो गया है। बेरोज़गारी, मुद्रा के अवमूल्यन और बढ़ती महंगाई ने लोगों का गुस्सा और भड़का दिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान में हो रही हिंसा को लेकर चिंता जताई जा रही है। कई देश और मानवाधिकार संगठन प्रदर्शनकारियों पर की जा रही गोलीबारी की निंदा कर चुके हैं और ईरान सरकार से संयम बरतने तथा मानवाधिकारों का सम्मान करने की अपील कर रहे हैं। हालांकि ईरानी सरकार ने मौतों के आंकड़े को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, लेकिन स्थानीय सूत्रों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
कुल मिलाकर, ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। लगातार बढ़ती हिंसा और दमन से हालात और ज्यादा विस्फोटक बनते जा रहे हैं, जिससे देश में अस्थिरता का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।




