भारत की अध्यक्षता में BRICS शेरपा बैठक की शुरुआत नई दिल्ली में हो गई है। यह बैठक भारत द्वारा BRICS की अध्यक्षता संभालने के बाद आयोजित की जा रही पहली शेरपा बैठक है, जिसमें सभी सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोग को मजबूत करना और BRICS को एक प्रभावी बहुपक्षीय मंच के रूप में आगे बढ़ाना है।
भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के लिए ‘मानवता-प्रथम’ दृष्टिकोण को केंद्र में रखा है। बैठक के दौरान भारतीय शेरपा ने प्रधानमंत्री के जन-केंद्रित विजन को साझा करते हुए कहा कि भारत BRICS मंच के माध्यम से वैश्विक विकास में मानव कल्याण, समावेशिता और समान अवसरों को प्राथमिकता देना चाहता है। भारत का मानना है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
शेरपा बैठक में आर्थिक सहयोग, नवाचार और सतत विकास जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। सदस्य देशों ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, विकासशील देशों की जरूरतों, तकनीकी सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार जैसे विषयों पर अपने-अपने विचार साझा किए। भारत ने विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज़ को मजबूत करने पर जोर दिया।
BRICS समूह के हालिया विस्तार को भी बैठक में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। अब BRICS में कुल 11 सदस्य देश शामिल हैं, जिससे इसकी वैश्विक भूमिका और प्रभाव बढ़ा है। यह समूह विश्व की बड़ी आबादी और वैश्विक जीडीपी के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसकी सामूहिक आवाज और मजबूत हुई है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह शेरपा बैठक आगामी BRICS शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। बैठक के निष्कर्षों के आधार पर सदस्य देशों के बीच सहयोग को और गहराई देने तथा वैश्विक शासन में सुधार से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाया जाएगा। भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी अध्यक्षता के दौरान BRICS सहयोग, संवाद और साझा भविष्य के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।




