मानवाधिकारों को विकास से जोड़ें, राजनीति से नहीं— भारत का स्पष्ट रुख

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संयुक्त राष्ट्र में आयोजित मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने मानवाधिकारों के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर समग्र और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों को चयनात्मक नजरिए या राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें वास्तविक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों की चर्चा का केंद्र बिंदु मानव गरिमा, समानता और न्याय होना चाहिए, न कि आरोप-प्रत्यारोप या दोहरे मानदंड।

विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि आज दुनिया कई जटिल चुनौतियों—जैसे संघर्ष, आतंकवाद, महामारी, आर्थिक असमानता और जलवायु संकट—का सामना कर रही है। ऐसे समय में वैश्विक समुदाय को विभाजनकारी राजनीति के बजाय सहयोग, संवाद और क्षमता निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद को मानवाधिकारों के सबसे गंभीर उल्लंघनों में से एक बताते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकती और इसके प्रति वैश्विक स्तर पर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जानी चाहिए।

जयशंकर ने यह भी उल्लेख किया कि भारत का हालिया चुनाव United Nations Human Rights Council के सदस्य के रूप में भारी समर्थन के साथ हुआ है, जो वैश्विक समुदाय विशेषकर वैश्विक दक्षिण के देशों के भारत पर भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत मानवाधिकारों को केवल सैद्धांतिक मुद्दा नहीं मानता, बल्कि विकास, सामाजिक न्याय और समावेशिता के माध्यम से इसे व्यवहारिक रूप में लागू करने का प्रयास करता है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कदमों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे तकनीक के माध्यम से करोड़ों लोगों तक पारदर्शी तरीके से सेवाएं और लाभ पहुंचाए गए हैं, जिससे मानवाधिकारों को सशक्त आधार मिला है।

अपने संबोधन के अंत में विदेश मंत्री ने दोहराया कि मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए वैश्विक संस्थाओं को निष्पक्षता, पारदर्शिता और समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का विषय बनाने के बजाय उन्हें मानव-केंद्रित विकास और स्थायी शांति के आधार के रूप में देखा जाना चाहिए। जयशंकर के इस संदेश ने स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर मानवाधिकारों के प्रश्न को संतुलित, व्यावहारिक और विकासोन्मुख नजरिए से आगे बढ़ाने के पक्ष में

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