पश्तून इलाकों की बंटवारे की कहानी, आज भी सुलग रहा है विवाद

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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव की जड़ 132 साल पुराना ‘डूरंड लाइन’ विवाद माना जाता है। यह सीमा रेखा वर्ष 1893 में ब्रिटिश भारत के प्रतिनिधि Sir Mortimer Durand और अफगान शासक Abdur Rahman Khan के बीच हुए समझौते के तहत तय की गई थी। करीब 2,640 किलोमीटर लंबी यह रेखा आज पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा मानी जाती है, लेकिन अफगानिस्तान ने इसे कभी औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया। काबुल का तर्क है कि यह एक औपनिवेशिक विरासत है, जिसने पश्तून और बलोच समुदायों को कृत्रिम रूप से दो हिस्सों में बांट दिया।

पाकिस्तान डूरंड लाइन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमा बताता है और हाल के वर्षों में उसने इस पर बाड़बंदी भी की है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान—खासतौर पर Taliban के सत्ता में आने के बाद—इस सीमा को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराता रहा है। सीमा पर अक्सर गोलीबारी, चौकियों पर झड़पें और हवाई हमलों के आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहे हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल Tehrik-i-Taliban Pakistan (टीटीपी) जैसे संगठनों द्वारा उसके खिलाफ हमलों के लिए किया जाता है, जबकि अफगानिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है और उल्टा पाकिस्तान पर सीमा उल्लंघन का आरोप लगाता है।

हालिया तनाव तब और बढ़ गया जब सीमा पार हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों की खबरें सामने आईं। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर उकसावे और आक्रामक कार्रवाई के आरोप लगाए, जिससे सीमा क्षेत्र में हालात अस्थिर हो गए। इस संघर्ष का सीधा असर सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों, व्यापार और आवाजाही पर पड़ा है। तोरखम और चमन जैसे प्रमुख सीमा मार्ग कई बार बंद हुए, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और स्थानीय लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि डूरंड लाइन विवाद केवल एक सीमा रेखा का मुद्दा नहीं, बल्कि पहचान, संप्रभुता और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा जटिल राजनीतिक प्रश्न है। जब तक दोनों देश कूटनीतिक स्तर पर भरोसे और संवाद की प्रक्रिया को मजबूत नहीं करते, तब तक यह 132 साल पुराना विवाद क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बना रह सकता है। फिलहाल, पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों में आई ताजा तल्खी इस बात का संकेत है कि डूरंड लाइन का प्रश्न आज भी दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

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