भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री शक्ति को और सुदृढ़ करते हुए अत्याधुनिक युद्धपोत Indian Navy में INS अंजदीप को औपचारिक रूप से शामिल कर लिया है। एंटी-सबमरीन वारफेयर क्षमता से लैस INS Anjadip को चेन्नई पोर्ट पर आयोजित एक भव्य समारोह में कमीशन किया गया, जिसकी अध्यक्षता नौसेना प्रमुख Admiral Dinesh K Tripathi ने की। इस युद्धपोत के बेड़े में शामिल होने से भारत की तटीय सुरक्षा व्यवस्था और पनडुब्बी-रोधी क्षमता को उल्लेखनीय मजबूती मिली है।
INS अंजदीप को विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए डिजाइन किया गया है। लगभग 77 मीटर लंबा यह युद्धपोत आधुनिक वाटर-जेट प्रणोदन प्रणाली से लैस है, जिससे यह लगभग 25 नॉट्स की गति प्राप्त कर सकता है। इसमें उन्नत ‘अभय’ सोनार प्रणाली, स्वदेशी लाइटवेट टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट्स लगाए गए हैं, जो इसे दुश्मन की पनडुब्बियों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह जहाज तटीय निगरानी, समुद्री गश्त, सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन तथा कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों को अंजाम देने में भी सक्षम है।
यह युद्धपोत एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) परियोजना का हिस्सा है, जिसके तहत कुल आठ ऐसे जहाजों का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत की समुद्री सीमाओं को पनडुब्बी खतरों से सुरक्षित रखना और तटीय सुरक्षा ढांचे को और मजबूत बनाना है। INS अंजदीप का निर्माण स्वदेशी तकनीक और संसाधनों से किया गया है, जो Make in India और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
भारत की विस्तृत समुद्री सीमा और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों को देखते हुए INS अंजदीप जैसे आधुनिक युद्धपोतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यह जहाज न केवल भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करता है, बल्कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में भी अहम योगदान देगा। कुल मिलाकर, INS अंजदीप का नौसेना में शामिल होना भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति में एक निर्णायक और दूरगामी कदम माना जा रहा है।




