होर्मुज पर बढ़ता संकट: जापान-ऑस्ट्रेलिया ने नौसैनिक तैनाती से किया इनकार, सऊदी ने नाकाम किए ड्रोन हमले

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं और इसका असर वैश्विक सुरक्षा व ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई दे रहा है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच जापान और ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका के उस अनुरोध को फिलहाल ठुकरा दिया है जिसमें सहयोगी देशों से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना भेजने की अपील की गई थी। दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात में वे होर्मुज क्षेत्र में युद्धपोत तैनात करने की कोई योजना नहीं बना रहे हैं।

अमेरिका की ओर से सहयोगी देशों को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा में शामिल होने के लिए कहा गया था, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़ते हमलों और सैन्य गतिविधियों के कारण इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि जापान ने अपने संवैधानिक प्रावधानों और सुरक्षा नीतियों का हवाला देते हुए नौसैनिक तैनाती से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी सैन्य प्राथमिकताओं और क्षमता को देखते हुए फिलहाल नौसेना भेजने से इनकार कर दिया है।

इस बीच खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के अहम ठिकानों को निशाना बनाकर भेजे गए करीब 23 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। सऊदी अधिकारियों के अनुसार इन ड्रोन को तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों पर हमले के लिए भेजा गया था, लेकिन समय रहते उन्हें नष्ट कर दिया गया, जिससे किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।

पश्चिम एशिया में जारी इस तनाव के कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा सतर्कता बढ़ा दी गई है। कई खाड़ी देशों ने अपने बंदरगाहों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों की सुरक्षा मजबूत कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं।

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