आरएसएस अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। संघ के शीर्ष नेतृत्व की नजर में Uttar Pradesh और Uttarakhand संगठन के लिए बेहद अहम क्षेत्र हैं। हाल ही में हरियाणा के Panipat जिले के समालखा में आयोजित संघ की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था Akhil Bharatiya Pratinidhi Sabha की तीन दिवसीय बैठक में संगठन के विस्तार और संरचना में बदलाव को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में देशभर से आए प्रतिनिधियों के बीच संगठन को जमीनी स्तर तक और मजबूत बनाने के लिए नई रणनीति पर विचार किया गया। सूत्रों के अनुसार संघ प्रांत आधारित मौजूदा व्यवस्था में बदलाव कर क्षेत्र और संभाग आधारित संरचना को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत पूरे देश में संगठन को कई क्षेत्रों और करीब 80 से अधिक संभागों में पुनर्गठित करने की तैयारी है, ताकि स्थानीय स्तर पर कामकाज को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सके।
संघ के सूत्रों का कहना है कि इस नई व्यवस्था में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को मिलाकर एक अहम क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इन दोनों राज्यों में संघ की शाखाओं और कार्यकर्ताओं की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में एक समन्वित ढांचे के जरिए संगठन की गतिविधियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विस्तार अभियान को और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।
बैठक में संघ के विस्तार अभियान और जनसंपर्क गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। संघ का दावा है कि पिछले एक वर्ष में देशभर में हजारों नई शाखाएं शुरू की गई हैं और व्यापक स्तर पर संपर्क अभियान चलाकर करोड़ों लोगों तक पहुंच बनाई गई है। संगठन का लक्ष्य आने वाले समय में गांव-गांव और शहरों के मोहल्लों तक अपनी गतिविधियों को और मजबूत करना है।
हालांकि संघ की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि प्रस्तावित संगठनात्मक बदलाव तुरंत लागू नहीं किए जाएंगे। फिलहाल संघ अपने शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों और सामाजिक अभियानों पर ध्यान दे रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से जुड़े इस नए ढांचे को आगामी विधानसभा चुनावों के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को संगठनात्मक रूप से विशेष महत्व देने की रणनीति संघ की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य माना जाता है, जबकि उत्तराखंड में भी संघ का मजबूत नेटवर्क है। ऐसे में दोनों राज्यों पर विशेष फोकस से संगठन की गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।




