बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी स्थिति को बेहद मजबूत करते हुए राज्य की सत्ता पर अपना व्यापक नियंत्रण स्थापित कर लिया है। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि 243 सदस्यीय विधानसभा में NDA के पास 202 विधायक हैं, जो उसे स्पष्ट और प्रचंड बहुमत प्रदान करते हैं। यह संख्या न केवल सरकार की स्थिरता को दर्शाती है, बल्कि विपक्ष की कमजोर स्थिति को भी उजागर करती है।
वहीं, लोकसभा के स्तर पर भी NDA का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 30 सीटों पर NDA के सांसद हैं, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में भी गठबंधन की पकड़ मजबूत बनी हुई है। इसके अलावा राज्यसभा में भी NDA का दबदबा कायम है, जहां 16 सीटों में से 12 सीटें उसके पास हैं। इस तरह राज्य की तीनों प्रमुख विधायी संस्थाओं में NDA की मजबूत उपस्थिति साफ तौर पर दिखाई देती है।
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों ने NDA की इस ताकत को और भी पुख्ता कर दिया है। चुनाव में गठबंधन ने सभी सीटों पर जीत हासिल की, जो उसके विधायकों की एकजुटता और मजबूत संगठनात्मक क्षमता का संकेत है। खास बात यह रही कि NDA के सभी विधायक एकजुट होकर मतदान करते नजर आए, जबकि विपक्षी खेमे में एकजुटता की कमी देखने को मिली। इस स्थिति ने राजनीतिक रूप से NDA को और अधिक बढ़त दिलाई।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनावों में मिली बड़ी जीत के बाद NDA लगातार अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा है। भाजपा के नेतृत्व में जदयू, लोजपा (रामविलास) और अन्य सहयोगी दलों के साथ गठबंधन ने राज्य में मजबूत पकड़ बनाई है। यही वजह है कि NDA अब केवल सत्ता में बने रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दीर्घकालिक राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अब NDA का अगला लक्ष्य आगामी चुनावों में अपनी स्थिति को और मजबूत करना और राज्य में अपने जनाधार का विस्तार करना है। इसके साथ ही संगठनात्मक स्तर पर भी रणनीति को और धार दी जा रही है, ताकि भविष्य में भी इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखा जा सके। मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि बिहार में NDA फिलहाल बेहद सशक्त स्थिति में है, जिससे विपक्ष के लिए चुनौती लगातार कठिन होती जा रही है।




