नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की रणनीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है और इसी संदर्भ में संसद में इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण चर्चा प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार, 30 मार्च को लोकसभा में “नक्सल मुक्त भारत” के लक्ष्य पर विशेष चर्चा होगी, जिसमें अब तक की कार्रवाई, सुरक्षा अभियानों की प्रगति और आगे की रणनीति पर विस्तार से विचार किया जाएगा। यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है और इस समयसीमा को लेकर सरकार पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि “नक्सल मुक्त भारत” सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है और इसे तय समयसीमा के भीतर हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में पिछले कुछ महीनों में बड़े पैमाने पर सुरक्षा अभियानों को तेज किया गया है, साथ ही आत्मसमर्पण नीति को भी प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, जिससे कई नक्सली मुख्यधारा में लौटे हैं।
ताजा घटनाक्रमों के अनुसार, 31 मार्च की समयसीमा नजदीक आते ही झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में व्यापक स्तर पर कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं और विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। खासतौर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है, जहां अब लगभग 96 प्रतिशत क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से मुक्त बताया जा रहा है। यहां सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद सरकार सुरक्षा कैंपों को धीरे-धीरे स्कूलों और अस्पतालों में बदलने की योजना पर भी काम कर रही है, जिससे विकास को बढ़ावा मिल सके।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पूरी तरह नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी कुछ चुनौतियां बाकी हैं, क्योंकि कुछ शीर्ष माओवादी नेता अब भी सक्रिय हैं और दूरदराज के इलाकों में उनकी मौजूदगी बनी हुई है। इसके बावजूद सरकार को भरोसा है कि सख्त कार्रवाई, बेहतर समन्वय और पुनर्वास नीतियों के जरिए इस लक्ष्य को जल्द ही हासिल किया जा सकेगा। कुल मिलाकर, संसद में होने वाली यह चर्चा न केवल सरकार की उपलब्धियों का आकलन करेगी, बल्कि भविष्य की रणनीति को भी दिशा देगी और यह तय करेगी कि देश नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त होने की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है।




