पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है और स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ समीक्षा बैठक कर राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों को कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, शांतिपूर्ण और निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि हिंसा, मतदाताओं को डराने-धमकाने, प्रलोभन देने, बूथ कैप्चरिंग या मतदान में किसी भी तरह की बाधा को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव आयोग के ये निर्देश राज्य के सभी प्रशासनिक स्तरों—जैसे मंडल आयुक्त, आईजी, एडीजीपी, जिलाधिकारी, एसएसपी और एसपी—पर लागू होंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाताओं को बिना किसी डर या दबाव के मतदान का अधिकार मिलना चाहिए और इसे सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। हाल ही में मालदा जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना ने आयोग की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद निगरानी और सख्ती और बढ़ा दी गई है। इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई है।
चुनाव आयोग ने “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने का संकेत देते हुए कहा है कि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग का उद्देश्य है कि हर मतदाता स्वतंत्र और सुरक्षित माहौल में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके और चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कायम रहे। कुल मिलाकर, आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव कड़ी निगरानी और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था के बीच कराए जाएंगे, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और विश्वसनीय बनी रहे।




