ईरान का बड़ा बयान: भारत की नीति सराही, अमेरिकी रुख पर जताई चिंता

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भारत की कूटनीतिक भूमिका की खुलकर सराहना की है, वहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की भाषा और रुख पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि Abdul Majid Hakeem Ilahi (डॉ. इलाही) ने कहा कि किसी भी नेता की भाषा उसके व्यक्तित्व और सोच को दर्शाती है, और कठोर या आक्रामक शब्दों का प्रयोग वैश्विक शांति के लिए सही संकेत नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त चेतावनी दी थी, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

डॉ. इलाही ने अमेरिका की आक्रामक नीति की अप्रत्यक्ष आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के बयान न केवल हालात को बिगाड़ते हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र में अस्थिरता को भी बढ़ावा देते हैं। उन्होंने इसे “बड़ी गलती” बताते हुए कहा कि युद्ध और टकराव से किसी को लाभ नहीं होगा, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और मानवीय हालात पर भी पड़ेगा। ईरान की ओर से यह भी अपील की गई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय आगे आए और तनाव कम करने के लिए अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव बनाए।

इस दौरान भारत की भूमिका को लेकर सकारात्मक रुख सामने आया। ईरान ने भारत को एक “करीबी मित्र” बताते हुए उसकी संतुलित और संवाद आधारित कूटनीति की सराहना की। हाल ही में S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत को भी महत्वपूर्ण बताया गया, जिसे क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ईरान का मानना है कि भारत जैसे देश मौजूदा संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं।

डॉ. इलाही ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र प्रभावी समाधान है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आक्रामक बयानबाजी और टकराव का सिलसिला जारी रहा, तो पूरा पश्चिम एशिया गंभीर संकट में फंस सकता है। कुल मिलाकर, ईरान का यह बयान वैश्विक स्तर पर बढ़ती आक्रामकता के बीच संतुलित और शांतिपूर्ण कूटनीति की आवश्यकता को रेखांकित करता है, जिसमें भारत की भूमिका को अहम माना जा रहा है।

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