ईरान युद्ध का ‘डोमिनो इफेक्ट’, प्लास्टिक से टेक्सटाइल तक सब प्रभावित

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पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर तनाव बढ़ने से तेल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका सीधा असर उन उद्योगों पर पड़ा है जो पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल पर निर्भर हैं।

भारत, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात के जरिए पूरा करता है, इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। तेल महंगा होने से परिवहन, उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ गई है, जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बना है। विशेष रूप से प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में कच्चे माल जैसे पॉलीथिन, पॉलीप्रोपाइलीन और एचडीपीई की कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इसके परिणामस्वरूप पाइप, पैकेजिंग सामग्री, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और औद्योगिक उत्पाद महंगे हो गए हैं।

इसी तरह, टेक्सटाइल उद्योग भी इस संकट से अछूता नहीं रहा है। सिंथेटिक फाइबर जैसे पॉलिएस्टर और नायलॉन, जो कच्चे तेल पर आधारित होते हैं, उनकी कीमतों में बढ़ोतरी के कारण धागे और कपड़े की लागत में इजाफा हुआ है। सूरत और लुधियाना जैसे प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में बुनकरों और छोटे कारोबारियों को उत्पादन लागत बढ़ने के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, और कई जगहों पर उत्पादन घटाना पड़ रहा है।

इसके अलावा, वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कच्चे माल की कमी और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण कई औद्योगिक इकाइयों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। महाराष्ट्र के कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में कंपनियों को भारी घाटा होने की खबरें भी सामने आई हैं। इस पूरी स्थिति का व्यापक असर महंगाई के रूप में सामने आ रहा है, जहां रोजमर्रा की वस्तुओं से लेकर औद्योगिक उत्पादों तक के दाम बढ़ रहे हैं।

कुल मिलाकर, ईरान युद्ध का प्रभाव अब केवल भू-राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक आर्थिक संकट का रूप लेता जा रहा है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत सहित दुनिया के कई देशों में महंगाई और आर्थिक दबाव और बढ़ने की आशंका है।

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