इजरायल-लेबनान संघर्ष पर ब्रेक, 10 दिन का युद्धविराम लागू

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पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच Israel और Lebanon के बीच 10 दिनों के अस्थायी सीजफायर को लेकर एक अहम कूटनीतिक पहल सामने आई है। इस युद्धविराम का दावा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने किया, जिन्होंने इसे क्षेत्र में शांति की दिशा में “बड़ा कदम” बताया। रिपोर्ट्स के अनुसार यह सीजफायर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत के बाद तय हुआ और इसे एक तरह के परीक्षण (टेस्ट पीरियड) के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता का आकलन किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि इस समझौते से पहले दोनों देशों के नेताओं के बीच जो संवाद स्थापित हुआ, वह करीब 34 साल बाद इस स्तर की पहली प्रत्यक्ष बातचीत मानी जा रही है। इस प्रक्रिया में Benjamin Netanyahu और लेबनान के नेतृत्व के बीच संपर्क स्थापित किया गया, जिससे इस अस्थायी संघर्ष विराम का रास्ता खुला। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्र में लगातार सैन्य गतिविधियों और हमलों के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए थे।

हालांकि सीजफायर की घोषणा को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बाद भी कुछ स्थानों पर उल्लंघन की खबरें सामने आई हैं। Israel की ओर से दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखने की बात कही गई है, जबकि Lebanon की तरफ से पूर्ण सैन्य वापसी की मांग जारी है, जिससे इस समझौते की स्थिरता पर सवाल बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीजफायर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर व्यापक क्षेत्रीय समीकरणों पर भी पड़ सकता है, खासकर Iran और United States के बीच चल रहे तनाव पर। ऐसे में आने वाले 10 दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर यह तय होगा कि यह पहल स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ेगी या फिर केवल एक अस्थायी विराम बनकर रह जाएगी।

कुल मिलाकर, दशकों पुरानी दुश्मनी के बीच 10 दिन का यह युद्धविराम एक नई शुरुआत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। 34 साल बाद हुई सीधी बातचीत और बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता से शांति की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन जमीनी हालात और आपसी अविश्वास अब भी इस राह को चुनौतीपूर्ण बनाए हुए हैं।

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