आदिवासी अधिकारों और पर्यावरण की अनदेखी: ग्रेट निकोबार परियोजना पर राहुल का प्रहार

SHARE:

ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस परियोजना पर केंद्र सरकार को घेरते हुए इसे “विकास के नाम पर विनाश” बताया है। अपने हालिया ग्रेट निकोबार दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि यह परियोजना देश की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों में से एक है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विकास की आड़ में पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है।

राहुल गांधी ने कहा कि ग्रेट निकोबार के घने वर्षावन, दुर्लभ वन्यजीव और अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र इस परियोजना से गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे। रिपोर्टों के अनुसार, इस परियोजना के लिए विशाल क्षेत्र में फैले प्राचीन जंगलों की कटाई करनी पड़ सकती है, जिससे द्वीप की जैव विविधता पर गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने इसे “विनाश को विकास का नाम देने” जैसा बताया और कहा कि सदियों में विकसित हुई प्राकृतिक धरोहर को अल्पकालिक आर्थिक लाभ के लिए नष्ट नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस नेता ने विशेष रूप से शॉम्पेन और निकोबारी जैसे आदिवासी समुदायों की चिंता उठाई। उनका कहना है कि इस परियोजना से इन समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली, संस्कृति और आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। राहुल गांधी ने स्थानीय जनजातीय प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और आश्वासन दिया कि उनकी आवाज संसद से लेकर देशभर में उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन समुदायों ने सदियों से इन द्वीपों की रक्षा की है, उनकी सहमति के बिना कोई भी विकास न्यायसंगत नहीं हो सकता।

करीब 81 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, ऊर्जा संयंत्र और आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की योजना है। केंद्र सरकार इसे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक और आर्थिक स्थिति मजबूत करने वाला कदम बता रही है। हालांकि, पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने भी इसके संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से इस परियोजना की व्यापक समीक्षा करने, पर्यावरणीय चिंताओं को प्राथमिकता देने और स्थानीय आदिवासी समुदायों की सहमति सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर छिड़ी यह बहस विकास, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी अधिकारों के बीच संतुलन की चुनौती को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ले आई है।

Leave a Comment