अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अपनी रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान का एक विशाल तेल टैंकर अमेरिकी निगरानी और दबाव के बावजूद सुरक्षित रूप से आगे बढ़ने में सफल रहा। यह सुपरटैंकर लगभग 19 लाख बैरल कच्चे तेल से लदा हुआ था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 22 करोड़ डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 2,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। ऐसे समय में जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री मार्गों पर अपनी निगरानी और दबाव बढ़ा रखा है, ईरान की यह सफलता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
समुद्री निगरानी एजेंसियों के मुताबिक, यह टैंकर पहले श्रीलंका के आसपास देखा गया था। इसके बाद उसने अपनी लोकेशन ट्रैकिंग को सीमित कर दिया और फिर इंडोनेशिया के लोम्बोक जलडमरूमध्य के रास्ते पूर्वी एशिया की ओर बढ़ता पाया गया। माना जा रहा है कि इसी रणनीति की मदद से वह अमेरिकी निगरानी से बचने में सफल रहा। ईरान लंबे समय से पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद अपने तेल निर्यात को जारी रखने के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्गों और तकनीकों का इस्तेमाल करता रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और समुद्री दबाव के बीच इस टैंकर का सुरक्षित निकलना न केवल ईरान के लिए आर्थिक राहत लेकर आया है, बल्कि यह उसकी समुद्री रणनीति और प्रतिबंधों से निपटने की क्षमता को भी दर्शाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद तेल निर्यात बनाए रखना ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। इस घटना ने अमेरिका की नाकेबंदी की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं। वहीं, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अब इस क्षेत्र की गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान इसी तरह अमेरिकी दबाव को चुनौती देते हुए अपने तेल निर्यात को जारी रख पाता है या नहीं।




