ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारतीय सशस्त्र बलों के साहस और पराक्रम को नमन करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने के अपने संकल्प पर मजबूती से कायम है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि एक वर्ष पहले भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अद्वितीय बहादुरी और सटीक रणनीति का परिचय देते हुए पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हुए आतंकी हमले का करारा जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि यह अभियान भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ केवल निंदा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आतंकियों और उनके संरक्षकों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई जारी रखेगा।
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 6-7 मई 2025 की रात को हुई थी। यह सैन्य कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी, जिसमें कई निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में मौजूद आतंकी ढांचों, लॉन्च पैड और प्रशिक्षण केंद्रों को निशाना बनाते हुए सटीक हमले किए थे। इस अभियान को भारत की बदली हुई सुरक्षा नीति और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा गया। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले संसद में भी कहा था कि भारत ने अब आतंकवाद के खिलाफ “न्यू नॉर्मल” स्थापित कर दिया है, जिसके तहत आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।
वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री S. Jaishankar और कई केंद्रीय मंत्रियों ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल चित्र बदलकर ऑपरेशन सिंदूर को श्रद्धांजलि दी। इसे भारतीय सेना के शौर्य और आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुटता का प्रतीक माना गया। भारतीय वायुसेना ने भी इस अवसर पर एक विशेष वीडियो जारी करते हुए कहा कि “भारत कुछ नहीं भूलता, किसी को माफ नहीं करता।” इस संदेश को भारत की सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और आतंकवाद के खिलाफ लगातार जारी कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी दोहराया कि भारत भविष्य में भी आतंकवाद के खिलाफ हर जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारतीय सशस्त्र बल हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और तीनों सेनाओं के बेहतर समन्वय को भारत की बढ़ती सैन्य ताकत का आधार बताते हुए कहा कि देश लगातार अपनी सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।




