बांग्लादेश की तीस्ता नदी परियोजना में चीन की बढ़ती भागीदारी ने दक्षिण एशिया की राजनीति और क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने औपचारिक रूप से चीन से तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट में सहयोग और निवेश का अनुरोध किया है। इस मुद्दे पर बीजिंग में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खालिलुर रहमान और चीन के विदेश मंत्री Wang Yi के बीच विस्तृत बातचीत हुई। दोनों देशों ने आर्थिक, आधारभूत संरचना और विकास परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, जिसके बाद इस परियोजना को लेकर भारत की चिंता भी बढ़ गई है।
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। यह नदी बांग्लादेश के उत्तरी क्षेत्रों में सिंचाई, खेती और लाखों लोगों की आजीविका के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बांग्लादेश लंबे समय से भारत के साथ तीस्ता जल बंटवारे के स्थायी समझौते की मांग करता रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियों और राजनीतिक मतभेदों के कारण अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है। वर्ष 1983 में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी जल बंटवारा व्यवस्था बनाई गई थी, लेकिन उसे स्थायी संधि का रूप नहीं दिया जा सका।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की इस परियोजना में बढ़ती भूमिका भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मानी जा रही है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि तीस्ता परियोजना भारत के महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब स्थित है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला अहम भूभाग है। ऐसे में चीन की मौजूदगी को केवल आर्थिक सहयोग के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। चीन पहले भी इस परियोजना में रुचि दिखा चुका है और अब बांग्लादेश द्वारा औपचारिक सहयोग मांगने के बाद उसकी भूमिका और मजबूत होती दिखाई दे रही है।
बैठक के दौरान चीन ने कहा कि वह बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत बांग्लादेश के विकास कार्यक्रमों में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है। चीन ने बांग्लादेश में आधारभूत संरचना, निवेश और तकनीकी परियोजनाओं में साझेदारी को और मजबूत करने की बात कही। वहीं बांग्लादेश ने भी ‘वन चाइना’ नीति के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश और चीन के बीच आर्थिक एवं कूटनीतिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। नई दिल्ली पहले भी तीस्ता बेसिन के संरक्षण और तकनीकी सहयोग का प्रस्ताव दे चुकी है, लेकिन अब चीन की सक्रियता ने भारत की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तीस्ता जल विवाद अब केवल जल बंटवारे का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत, बांग्लादेश और चीन के बीच बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।




