सैन्य नेतृत्व में बड़ा फेरबदल, नए CDS और नौसेना प्रमुख का ऐलान

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भारत सरकार ने देश के सैन्य नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया है। इसके साथ ही वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का अगला प्रमुख बनाया गया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, दोनों अधिकारी मई 2026 के अंत में अपना नया कार्यभार संभालेंगे। इन नियुक्तियों को भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और संयुक्त सैन्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वर्तमान सीडीएस जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। उनके बाद लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि देश के दूसरे सैन्य प्रमुखों के साथ मिलकर तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन और रक्षा सुधारों का नेतृत्व करेंगे। उन्हें रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) का सचिव भी बनाया गया है। राजा सुब्रमणि भारतीय सेना के बेहद अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं और उन्होंने करीब 39 वर्षों तक सेना में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

राजा सुब्रमणि इससे पहले सेना के उप प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) और केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं। वर्तमान में वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका सैन्य अनुभव जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और अन्य सामरिक क्षेत्रों में लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाने से जुड़ा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में थिएटर कमांड प्रणाली, सैन्य समन्वय और आधुनिक युद्ध तकनीकों को अपनाने की प्रक्रिया को और गति मिलेगी।

दूसरी ओर, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन 31 मई 2026 को भारतीय नौसेना प्रमुख का पद संभालेंगे। वे वर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी का स्थान लेंगे। फिलहाल वे मुंबई स्थित पश्चिमी नौसैनिक कमान के प्रमुख हैं और इससे पहले नौसेना के उप प्रमुख की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। उन्हें संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है।

कृष्णा स्वामीनाथन ने भारतीय नौसेना के कई अहम अभियानों और रणनीतिक योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य की कमान संभाल चुके हैं और पश्चिमी बेड़े के कमांडर के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमता और रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करेगी।

रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार, इन दोनों नियुक्तियों से भारतीय सेना और नौसेना के बीच समन्वय बढ़ेगा तथा भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए देश की सैन्य तैयारियों को नई दिशा मिलेगी।

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