US-Iran तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

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Pakistan की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया विवाद खड़ा हो गया है। हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पाकिस्तान ने अपने एयरबेस पर ईरानी विमानों को जगह दी थी। अब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के बयान के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है। पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि ईरानी विमान उसके एयरबेस पर मौजूद थे, हालांकि उसने इसे केवल “कूटनीतिक और प्रशासनिक जरूरत” बताया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, संघर्ष के दौरान Iran ने अपने कुछ सैन्य और विमानन संसाधनों को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर भेजा था। यह एयरबेस रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान का एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना माना जाता है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया कि इन विमानों को संभावित अमेरिकी और इजरायली हमलों से बचाने के उद्देश्य से पाकिस्तान में रखा गया था। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि इनमें खुफिया और निगरानी मिशनों में इस्तेमाल होने वाले कुछ विशेष सैन्य विमान शामिल थे।

विवाद उस समय और गहरा गया जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ईरानी विमान युद्धविराम अवधि के दौरान पाकिस्तान पहुंचे थे और उनका किसी सैन्य अभियान से सीधा संबंध नहीं था। हालांकि, इस बयान को कई विशेषज्ञ पाकिस्तान की ओर से अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति मान रहे हैं कि ईरानी विमान वास्तव में उसके एयरबेस पर मौजूद थे। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के अधिकारियों की आवाजाही तथा वार्ता प्रक्रिया से जुड़े कारणों से कुछ विमान पाकिस्तान आए थे।

इस घटनाक्रम के बाद United States में भी पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी नेताओं और अधिकारियों ने कहा है कि यदि रिपोर्ट्स सही हैं तो अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। अमेरिकी राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि पाकिस्तान एक ओर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, जबकि दूसरी ओर वह ईरान को रणनीतिक सहयोग भी दे रहा था।

दरअसल, हाल के महीनों में पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने वाले एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा था। इस दौरान इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें भी हुई थीं। लेकिन एयरबेस विवाद सामने आने के बाद पाकिस्तान की निष्पक्ष भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की कूटनीति पर बड़ा असर डाल सकता है और इससे अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में भी नई तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो सकती है।

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