केमिस्टों का राष्ट्रव्यापी बंद, दवा वितरण व्यवस्था पर उठे सुरक्षा संबंधी सवाल

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देशभर में ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में आयोजित हड़ताल का मंगलवार को व्यापक असर देखने को मिला। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर लाखों दवा विक्रेताओं ने अपने मेडिकल स्टोर बंद रखे। राजधानी Delhi समेत कई बड़े शहरों में दवा दुकानों पर ताले लगे रहे, जिसके कारण आम लोगों को दवाइयों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। व्यापारिक संगठनों के मुताबिक इस एक दिन की हड़ताल से करीब ढाई हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ, जबकि दिल्ली में लगभग 90 फीसदी मेडिकल स्टोर बंद रहे।

दवा विक्रेताओं का आरोप है कि ऑनलाइन दवा बिक्री करने वाली ई-फार्मेसी कंपनियां बिना पर्याप्त नियमन के काम कर रही हैं, जिससे पारंपरिक मेडिकल स्टोर कारोबार पर गंभीर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई प्लेटफॉर्म बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाइयां उपलब्ध करा रहे हैं, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है। साथ ही भारी छूट और ऑनलाइन डिलीवरी मॉडल के कारण छोटे और मध्यम स्तर के मेडिकल स्टोर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। संगठन का मानना है कि यदि इस व्यवस्था को नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में लाखों छोटे दवा विक्रेताओं का रोजगार प्रभावित हो सकता है।

हड़ताल के दौरान देश के कई शहरों में दवा आपूर्ति प्रभावित हुई, हालांकि अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और कुछ आपातकालीन सेवाओं को चालू रखा गया ताकि गंभीर मरीजों को दिक्कत न हो। कई राज्यों में प्रशासन ने आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए निगरानी भी बढ़ाई। इस बीच दवा विक्रेताओं ने केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़े नियमों की समीक्षा करने और सख्त नियामक ढांचा तैयार करने की मांग की है।

दवा व्यापार संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन केवल व्यापारिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल हेल्थ सेवाओं को पूरी तरह रोकने के बजाय सरकार को ऐसा संतुलित कानून लाना चाहिए जिससे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों व्यवस्थाएं सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से संचालित हो सकें।

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