मेडिकल प्रवेश परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, NEET सुधारों की मांगी रिपोर्ट

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NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, National Testing Agency (NTA), Central Bureau of Investigation और पूर्व इसरो प्रमुख की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि यह “दुखद” है कि NTA ने पिछली गलतियों से कोई सबक नहीं लिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्ष 2024 में पेपर लीक विवाद और उससे जुड़े मामलों पर दिए गए निर्देशों के बावजूद परीक्षा व्यवस्था में सुधार के पर्याप्त संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में बार-बार सामने आने वाली अनियमितताएं लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती हैं, इसलिए जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने की, जिसने केंद्र सरकार, NTA और CBI से जवाब मांगा है। अदालत ने NTA को निर्देश दिया कि वह 2024 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुझाए गए सुधारों और सुरक्षा उपायों के अनुपालन की स्थिति पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। साथ ही, अदालत ने यह जानने की आवश्यकता जताई कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि सुधारात्मक कदम समय पर लागू नहीं किए गए, तो परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

याचिकाओं में यह मांग उठाई गई है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए मौजूदा NTA व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए और उसे अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बार-बार सामने आने वाली परीक्षा संबंधी अनियमितताओं ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है। कुछ याचिकाओं में NTA के पुनर्गठन, स्वतंत्र निगरानी तंत्र, तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा संचालन की निगरानी के लिए नई संस्थागत प्रणाली बनाने की मांग भी शामिल है।

यह विवाद NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद और गहरा गया। परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका और कथित “गेस पेपर” से प्रश्नों के मिलान के दावों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए, जिसके बाद जांच CBI को सौंपी गई। इस घटनाक्रम ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस शुरू हो गई।

दरअसल, वर्ष 2024 के विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई थी। समिति ने परीक्षा सुरक्षा, पारदर्शिता, तकनीकी निगरानी और संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करने से जुड़े कई सुझाव दिए थे। हालांकि हालिया घटनाओं के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि उन सिफारिशों को किस हद तक लागू किया गया और क्या परीक्षा प्रणाली वास्तव में पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो पाई है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजरें टिकी हुई।

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