समुद्री सुरक्षा पर बड़ा फोकस: रिटायरमेंट से पहले नेवी चीफ ने गिनाईं नौसेना की तैयारियां

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भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में बदलती रणनीतिक चुनौतियों और बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए अपनी पनडुब्बी-रोधी (एंटी-सबमरीन वारफेयर) तथा समुद्री निगरानी क्षमताओं को तेजी से मजबूत कर रही है। सेवानिवृत्ति से पहले दिए गए अपने बयान में नौसेना प्रमुख Admiral Dinesh K. Tripathi ने कहा कि नौसेना अब केवल पारंपरिक समुद्री युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक, सेंसर-आधारित निगरानी तंत्र और नेटवर्क-केंद्रित सैन्य संचालन के जरिए समुद्र में संभावित खतरों पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने बताया कि हिंद महासागर क्षेत्र में बाहरी शक्तियों की बढ़ती गतिविधियों और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को नई तकनीकों और आधुनिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से मजबूत बना रहा है।

एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार भारतीय नौसेना ने पानी के भीतर निगरानी क्षमता, लंबी दूरी की समुद्री टोही और पनडुब्बियों की पहचान करने वाली प्रणालियों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके और त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके। उन्होंने कहा कि समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को मजबूत करने के लिए उन्नत सेंसर, डेटा साझा करने की प्रणाली और विभिन्न हथियार तथा निगरानी प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर समन्वय विकसित किया जा रहा है। नौसेना की मिशन-आधारित तैनाती रणनीतिक समुद्री मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार मौजूदगी बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रही है।

नौसेना प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षमता विस्तार किसी एक देश को लक्ष्य बनाकर नहीं किया जा रहा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर अब केवल सहयोग का क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यहां रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक सक्रियता तेजी से बढ़ी है, जिससे समुद्री सुरक्षा और व्यापार मार्गों की रक्षा का महत्व पहले से अधिक बढ़ गया है।

आधुनिकीकरण के तहत भारतीय नौसेना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों और उन्नत प्लेटफॉर्म को शामिल करने पर काम कर रही है। इसी दिशा में छह नई स्टील्थ पनडुब्बियों की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जिन्हें Project 75(I) के तहत शामिल किया जाएगा। इन पनडुब्बियों के शामिल होने से समुद्र के भीतर निगरानी, दुश्मन पनडुब्बियों की पहचान और सामरिक प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही नौसेना आने वाले वर्षों में 200 से अधिक युद्धपोतों वाली ताकत बनने के लक्ष्य की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति और मजबूत हो सके।

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