भारत और ओमान के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने वाला व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) आज से लागू हो गया है। इसे प्रधानमंत्री Narendra Modi सरकार की आर्थिक कूटनीति का एक अहम कदम माना जा रहा है। यह समझौता मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाले प्रमुख मुक्त व्यापार समझौतों में शामिल है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। समझौते के लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों को ओमान के बाजार में बड़े पैमाने पर शुल्क-मुक्त या कम शुल्क वाली पहुंच मिलने की संभावना है, जिससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
इस समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को ओमान की बड़ी संख्या में टैरिफ श्रेणियों में ड्यूटी-फ्री बाजार पहुंच मिलने की बात कही जा रही है। इससे कृषि उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, फार्मास्युटिकल, पेट्रोकेमिकल और ऑटो कंपोनेंट जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा शुल्क में राहत मिलने से भारतीय उत्पाद ओमान में अधिक किफायती और प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे, जिससे निर्यात में वृद्धि और उद्योगों को नए बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी।
दूसरी ओर, भारत ने भी ओमान से आने वाले कई उत्पादों पर शुल्क रियायत देने का प्रावधान किया है। माना जा रहा है कि इससे खजूर, पेट्रोकेमिकल उत्पादों, मार्बल और कुछ औद्योगिक वस्तुओं के आयात को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि घरेलू उद्योगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ संवेदनशील उत्पादों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है या उन पर सीमित रियायत देने की नीति अपनाई गई है, ताकि स्थानीय बाजारों पर नकारात्मक असर न पड़े।
विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निवेश, सेवा क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स और कारोबारी सहयोग को भी नई गति दे सकता है। इसे पश्चिम एशिया में भारत की आर्थिक मौजूदगी मजबूत करने और क्षेत्रीय व्यापारिक प्रभाव बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इससे भारतीय कंपनियों को खाड़ी क्षेत्र के बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल सकती है और भविष्य में व्यापक आर्थिक साझेदारी के नए अवसर भी खुल सकते हैं।



