विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) ही भविष्य की राह है और पृथ्वी को सुरक्षित, स्वच्छ तथा समृद्ध बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और दैनिक जीवन में ऐसे कदम अपनाने की अपील की, जो पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, जल संकट और जैव विविधता में कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान केवल नीतियों और योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संभव है। उन्होंने नागरिकों से जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने जैसे प्रयासों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उनका कहना था कि छोटे-छोटे कदम भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
पीएम मोदी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य कर रहे सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों और समुदायों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयास देश को हरित और टिकाऊ भविष्य की ओर ले जा रहे हैं। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हैं, बल्कि लोगों को प्रकृति के साथ भावनात्मक रूप से भी जोड़ते हैं। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने वैश्विक मंचों पर हमेशा पर्यावरण संरक्षण और जलवायु न्याय की वकालत की है। देश नवीकरणीय ऊर्जा, हरित विकास और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सरकार, समाज और नागरिक मिलकर प्रयास करें तो भारत पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दुनिया के लिए एक उदाहरण बन सकता है।
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करना हमारी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने देशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को और मजबूत करने तथा सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उनके अनुसार, प्रकृति और विकास के बीच संतुलन स्थापित करके ही एक सुरक्षित, समृद्ध और बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।



