अफ्रीकी देश कांगो (Democratic Republic of the Congo) में इबोला वायरस का प्रकोप गंभीर रूप लेता जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, देश में इबोला संक्रमण के 550 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि मृतकों की संख्या 100 के पार पहुंच गई है। संक्रमण के तेजी से फैलने और पड़ोसी देशों तक इसके प्रभाव की आशंका के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इस प्रकोप का कारण इबोला का बंडीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन बताया जा रहा है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। कांगो के इतुरी, नॉर्थ किवू और साउथ किवू जैसे संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच और सुरक्षा चुनौतियों के कारण संक्रमण नियंत्रण अभियान प्रभावित हो रहा है।
बढ़ते खतरे को देखते हुए WHO ने इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती माना है और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी तथा उपचार व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, कई संक्रमित मरीजों की पहचान देर से होने के कारण सामुदायिक स्तर पर संक्रमण का प्रसार बढ़ा है। इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा सुविधाओं पर हमलों ने भी राहत और रोकथाम कार्यों को मुश्किल बना दिया है।
कांगो में बिगड़ती स्थिति के बीच भारत सहित कई एशियाई देशों ने सतर्कता बढ़ा दी है। भारत सरकार ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह जारी की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया है कि बुखार, उल्टी, दस्त या इबोला जैसे लक्षणों वाले यात्रियों की विशेष जांच की जाए और किसी भी संदिग्ध मामले की तत्काल सूचना दी जाए। हालांकि भारत में अब तक इबोला के इस स्ट्रेन का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त, शारीरिक द्रवों या संक्रमित वस्तुओं के संपर्क से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव शामिल हैं। संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए WHO ने करोड़ों डॉलर की आपात कार्ययोजना शुरू की है, जिसके तहत उपचार केंद्रों का विस्तार, सीमा निगरानी, सामुदायिक जागरूकता और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े इबोला प्रकोपों में से एक साबित हो सकता है।




