सरकार ने बढ़ाया समर्थन, दालों और तिलहनों की खरीद से किसानों को मिलेगा फायदा

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और दालों तथा तिलहनों के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने विभिन्न राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर दालों और तिलहनों की खरीद को मंजूरी दी है। इस फैसले का उद्देश्य किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाना, उनकी आय बढ़ाना और देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करना है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार, दालों और तिलहनों की खरीद प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) तथा मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत की जाएगी। सरकार लंबे समय से दलहन उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है। इसी रणनीति के तहत राज्यों को उनकी उत्पादन क्षमता और मांग के आधार पर खरीद की अनुमति दी जा रही है।

उत्तर प्रदेश इस पहल के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल है। केंद्र ने राज्य में मूंग और मूंगफली जैसी फसलों की खरीद को मंजूरी दी है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य में दलहन और तिलहन उत्पादन करने वाले किसानों को अब अपनी उपज के लिए बेहतर और सुनिश्चित मूल्य मिल सकेगा। इससे किसानों को खुले बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

सरकार का मानना है कि MSP पर खरीद बढ़ने से किसानों का विश्वास मजबूत होगा और वे दलहन एवं तिलहन की खेती के लिए अधिक प्रोत्साहित होंगे। इससे देश में इन फसलों का उत्पादन बढ़ेगा और खाद्य तेलों तथा दालों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम कृषि क्षेत्र में विविधीकरण को भी बढ़ावा देगा, क्योंकि किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ दलहन और तिलहन की खेती की ओर अधिक आकर्षित होंगे।

केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना उसकी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से खरीद व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस पहल से लाखों किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि दालों और तिलहनों की खरीद को बढ़ावा देने का यह निर्णय किसानों के लिए राहत भरा साबित होगा। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा, बल्कि देश की कृषि व्यवस्था को अधिक आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने में भी मदद मिलेगी।

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