भूजल प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता, कई इलाकों में मानक से ऊपर पाए गए हानिकारक तत्व

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देश के कई राज्यों में भूजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ाने वाली स्थिति सामने आई है। हालिया सरकारी आकलन में पाया गया है कि सात राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों में भूजल में आयरन, आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट और अन्य हानिकारक तत्व निर्धारित मानकों से अधिक मात्रा में मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे दूषित पानी का लंबे समय तक सेवन लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल किया गया है, जहां भूजल के बड़ी संख्या में नमूनों में आयरन का स्तर तय सीमा से ऊपर पाया गया। राज्य की बड़ी ग्रामीण आबादी पेयजल के लिए भूजल स्रोतों पर निर्भर है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार कई क्षेत्रों में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा भी चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुकी है। आर्सेनिक युक्त पानी के लंबे समय तक उपयोग से त्वचा संबंधी रोगों, कैंसर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, जबकि फ्लोराइड की अधिकता दांतों और हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा कुछ इलाकों में नाइट्रेट प्रदूषण भी पाया गया है, जिसे कृषि में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग और अपशिष्ट प्रबंधन की कमियों से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित भूजल दोहन, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियां और जल स्रोतों के संरक्षण में कमी भूजल प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।

जल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आने वाले वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य और जल सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। केंद्र और राज्य सरकारें जल जीवन मिशन, भूजल पुनर्भरण और जल गुणवत्ता निगरानी जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थिति सुधारने का प्रयास कर रही हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रभावित क्षेत्रों में नियमित जल परीक्षण, जल शुद्धिकरण प्रणालियों की स्थापना, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि वैज्ञानिक जल प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी के जरिए भूजल प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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