राम मंदिर चढ़ावा विवाद: ‘दोषियों को मिले कड़ी सजा, न कोई बचे और न कोई फंसे’ फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना हो सुनवाई, वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार

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Reported by: निखिल रस्तोगी

नई दिल्ली : अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने मांग की कि इस मामले में तुरन्त एफआईआर हो और चढ़ावे में हेराफेरी की जांच पुलिस पूरी सतर्कता और तेजी से करे, जल्द से जल्द चालान (चार्जशीट) दाखिल हो और फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई सुनिश्चित की जाए। आलोक कुमार ने कहा कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था को इस घटना से गहरी ठेस पहुंची है और खुद उनकी अपनी आस्था भी आहत हुई है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि न तो किसी असली दोषी को बचाया जाना चाहिए और न ही राजनीति के तहत किसी निर्दोष को फंसाया जाना चाहिए।

सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर होगी पहचान, जल्द सजा की मांग

विहिप अध्यक्ष ने साफ किया कि भगवान के धन में खयानत (धोखाधड़ी) करने वालों के खिलाफ कानूनी शिकंजा पूरी तरह पुख्ता होना चाहिए।

पुख्ता सबूतों पर हो एक्शन

आलोक कुमार ने बताया कि मामले में तथ्यों की पुष्टि और दोषियों की सही पहचान के लिए एक विस्तृत जांच बेहद जरूरी थी। अब जो भी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, गवाहों के बयानों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ बिना किसी लिहाज के सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचे जांच

उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अब आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो चुका है। हिंदू समाज को चैन और संतोष तब मिलेगा, जब भगवान के खजाने में हेराफेरी करने वाले जेल की सलाखों के पीछे होंगे।

“500 वर्षों का संघर्ष और करोड़ों राम भक्तों की आस्था” आहत हुए विहिप प्रमुख

राम मंदिर आंदोलन के इतिहास का जिक्र करते हुए आलोक कुमार भावुक भी नजर आए और उन्होंने मंदिर प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता की वकालत की | राम मंदिर के निर्माण के लिए हिंदू समाज ने पांच सौ वर्षों तक लंबा संघर्ष किया है और एक लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है। ऐसे पवित्र स्थान के चढ़ावे में गड़बड़ी की खबरों से करोड़ों राम भक्तों का दिल टूटा है। सभी दोषियों के खिलाफ ऐसी मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई होनी चाहिए कि भविष्य में कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके। साथ ही, मंदिर के चढ़ावे और धन प्रबंधन (Money Management) के लिए एक पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। जब उनसे ट्रस्ट प्रबंधन की जवाबदेही और जिम्मेदार पदाधिकारियों के संभावित इस्तीफों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेकर कीचड़ उछालना या टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वे ट्रस्ट के वरिष्ठ लोगों को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, और त्यागपत्र जैसे नैतिक फैसले संबंधित लोग समय आने पर स्वयं करेंगे। विहिप पूरी तरह से निष्पक्ष जांच का समर्थन करती है।

“कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले आज कर रहे राजनीति” सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला

इस संवेदनशील मुद्दे पर विपक्षी दलों द्वारा की जा रही घेराबंदी और बयानबाजी पर आलोक कुमार ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।

चुनावी रोटियां सेकने का आरोप

विहिप अध्यक्ष ने निशाना साधते हुए कहा कि जिन राजनीतिक दलों ने अतीत में हमेशा राम मंदिर आंदोलन का विरोध किया, राम भक्तों को अयोध्या पहुंचने से रोका और कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं, वे आज इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट फाइल कर कहा कि राम काल्पनिक पुरुष हैlऔर विपक्ष ने कभी भी नहीं प्रकट किया खेद: उन्होंने याद दिलाया कि जिन दलों ने मंदिर निर्माण का विरोध किया और प्राण प्रतिष्ठा समारोह के निमंत्रण को ठुकराकर दूरी बनाई थी, वे अब आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। आज तक इनमें से किसी भी दल ने अपने पुराने कृत्यों पर कोई खेद या माफी प्रकट नहीं की है।

अलोक कुमार ने अंत में अपनी बात को दोहराते हुए न्याय के सिद्धांत पर जोर दिया कि वीएचपी का स्पष्ट मत है— “न्याय निष्पक्ष हो; न किसी को बचाया जाए और न ही किसी को फंसाया जाए।”

 

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