प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड की महारानी मैक्सिमा से मुलाकात कर डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के क्षेत्र में सहयोग को लेकर विस्तृत चर्चा की। महारानी मैक्सिमा संयुक्त राष्ट्र महासचिव की वित्तीय स्वास्थ्य के लिए विशेष अधिवक्ता (UNSGSA) भी हैं और वैश्विक स्तर पर वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही हैं। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुरक्षित, सुलभ और किफायती वित्तीय सेवाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जा सकती हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित व्यवस्था ने करोड़ों लोगों को बैंकिंग और डिजिटल भुगतान सेवाओं से जोड़कर वित्तीय समावेशन को नई गति दी है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत अपने सफल डिजिटल मॉडल और तकनीकी अनुभव को अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि अधिक से अधिक देश इसका लाभ उठा सकें।
बैठक में आधार, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), डिजिलॉकर, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन पहलों ने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने, पारदर्शिता बढ़ाने, नकदी पर निर्भरता कम करने और ग्रामीण तथा वंचित वर्गों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का डिजिटल भुगतान मॉडल न केवल देश के भीतर आर्थिक गतिविधियों को आसान बना रहा है, बल्कि कई देशों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।
महारानी मैक्सिमा ने भारत में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने कम समय में व्यापक स्तर पर डिजिटल वित्तीय सेवाओं का सफल विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि इन तकनीकी उपलब्धियों का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे और इससे लोगों का वित्तीय स्वास्थ्य, आर्थिक सुरक्षा तथा जीवन स्तर बेहतर हो। उन्होंने डिजिटल वित्तीय सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव जैसे विषयों के महत्व पर भी जोर दिया।
महारानी मैक्सिमा तीन दिवसीय भारत यात्रा पर थीं, जिसके दौरान उन्होंने नई दिल्ली और मुंबई में सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, फिनटेक कंपनियों, नीति निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान वित्तीय स्वास्थ्य, डिजिटल भुगतान, नवाचार, सामाजिक सुरक्षा और समावेशी आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई उनकी बैठक को भारत और नीदरलैंड के बीच बढ़ते सहयोग के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का डिजिटल मॉडल अब विश्व के अनेक देशों के लिए एक भरोसेमंद उदाहरण बन चुका है और इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकता है।




