कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा में जारी मानवीय संकट को लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक लेख के माध्यम से उन्होंने कहा कि गाजा में लगातार हो रही हिंसा और आम नागरिकों की पीड़ा पर भारत सरकार की चुप्पी समझ से परे है। उनके अनुसार, भारत की विदेश नीति हमेशा शांति, मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय कानून और उपनिवेशवाद-विरोध जैसे सिद्धांतों पर आधारित रही है, लेकिन वर्तमान रुख उन मूल्यों से अलग दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में, जब दुनिया के कई देश गाजा की स्थिति पर खुलकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं, भारत की सीमित प्रतिक्रिया उसकी वैश्विक भूमिका और नैतिक नेतृत्व पर सवाल खड़े करती है।
सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि भारत की मौजूदा नीति के कारण देश अपने पारंपरिक सहयोगियों, विशेषकर फिलिस्तीन और पश्चिम एशिया के कई देशों से दूर होता नजर आ रहा है। उनके अनुसार, दशकों से भारत ने संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग पहचान बनाई थी, लेकिन हाल के वर्षों में यह संतुलन कमजोर हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इस स्थिति का लाभ पाकिस्तान जैसे देश उठाने की कोशिश कर रहे हैं, जो क्षेत्रीय स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना था कि भारत को अपने रणनीतिक हितों के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी समान महत्व देना चाहिए।
अपने लेख में सोनिया गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर हमास का हमला पूरी तरह अस्वीकार्य था और उसकी निंदा की जानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसके बाद गाजा में जिस स्तर पर आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, उस पर भी भारत को स्पष्ट और संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि गाजा में मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है और ऐसे समय में भारत को अपनी ऐतिहासिक विदेश नीति की परंपरा के अनुरूप शांति, युद्धविराम और नागरिकों की सुरक्षा की खुलकर वकालत करनी चाहिए।
सोनिया गांधी के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विदेश नीति जैसे संवेदनशील विषय पर भी राजनीति कर रही है और सरकार के संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रही है। भाजपा का कहना है कि भारत ने गाजा के लोगों के लिए लगातार मानवीय सहायता भेजी है और साथ ही इज़राइल के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को भी संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया है। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सोनिया गांधी के विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति, मानवीय मूल्यों और वैश्विक नैतिक जिम्मेदारियों के अनुरूप गाजा संकट पर अधिक स्पष्ट और प्रभावी रुख अपनाना चाहिए। इस बयान के बाद भारत की पश्चिम एशिया नीति और गाजा मुद्दे पर देश के आधिकारिक रुख को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।




