ग्रामीण परिवारों को राहत, नए कानून के तहत बढ़ी रोजगार गारंटी और मजदूरी

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केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम, 2025 को पूरे देश में लागू कर दिया है। इसके साथ ही ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में नई व्यवस्था प्रभावी हो गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार के अवसर, बेहतर मजदूरी और पारदर्शी भुगतान प्रणाली उपलब्ध कराना है। सरकार का कहना है कि यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के अकुशल रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही ग्रामीण मजदूरों की दैनिक मजदूरी में भी बढ़ोतरी की गई है। राष्ट्रीय औसत मजदूरी ₹298.80 से बढ़ाकर ₹327.40 प्रतिदिन कर दी गई है, जबकि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में न्यूनतम दैनिक मजदूरी ₹300 सुनिश्चित की गई है। राज्यवार मजदूरी दरों को भी संशोधित किया गया है और नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं।

सरकार ने नई व्यवस्था में भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया है। मजदूरी का भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल जॉब कार्ड, बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग और ऑनलाइन निगरानी जैसी तकनीकों को शामिल किया गया है, ताकि कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हो और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

योजना के वित्तीय ढांचे में भी बदलाव किया गया है। अधिकांश राज्यों में इसका खर्च केंद्र और राज्य सरकारें 60:40 के अनुपात में वहन करेंगी, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आधारभूत ढांचे के विकास को भी गति मिलेगी। हालांकि, कुछ राज्यों और विपक्षी दलों ने इस नई व्यवस्था के कुछ प्रावधानों और राज्यों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को लेकर सवाल भी उठाए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना और गांवों में दीर्घकालिक विकास कार्यों को बढ़ावा देना भी है। उनका मानना है कि इस कानून की सफलता इसके प्रभावी क्रियान्वयन, समय पर मजदूरी भुगतान और केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी।

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