ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, ‘न्यायिक प्रक्रिया के बीच बढ़ाया जा रहा काम’

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ग्रेट निकोबार द्वीप पर प्रस्तावित मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार देश के सबसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में से एक ग्रेट निकोबार को पर्यावरणीय तबाही की ओर धकेल रही है। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर कलकत्ता हाई कोर्ट में पांच याचिकाएं लंबित हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

जयराम रमेश ने कहा कि इन याचिकाओं में कैंपबेल बे और गलाथिया राष्ट्रीय उद्यानों के इको-सेंसिटिव जोन, वनाधिकार अधिनियम-2006 के अनुपालन, तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना-2019, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों से जुड़े मुद्दों को चुनौती दी गई है। उनका कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाना पर्यावरणीय और कानूनी दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, टाउनशिप और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से ग्रेट निकोबार की नाजुक जैव विविधता, मूंगा चट्टानों, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय जनजातीय समुदायों पर व्यापक असर पड़ सकता है। पार्टी का यह भी कहना है कि पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) की प्रक्रिया और परियोजना को मिली मंजूरियों को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं तथा विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

जयराम रमेश ने बताया कि उन्होंने इस विषय पर समय-समय पर प्रधानमंत्री सहित संबंधित केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर परियोजना की समीक्षा और पुनर्विचार की मांग की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी पहले इस परियोजना को लेकर सरकार की आलोचना कर चुके हैं और उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि ग्रेट निकोबार परियोजना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब विकसित करने, आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का दावा है कि परियोजना को सभी आवश्यक पर्यावरणीय और वैधानिक मंजूरियां निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राप्त हुई हैं। ऐसे में अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भविष्य न्यायिक प्रक्रिया और सरकार के अगले कदमों पर निर्भर करेगा।

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