भारत की रणनीतिक कूटनीति तेज, इंडोनेशिया के साथ रक्षा संबंध और ऑस्ट्रेलिया से परमाणु ईंधन सहयोग पर फोकस

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विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है, लेकिन वर्तमान में दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र से जुड़ी चर्चाएं अभी शुरुआती और तैयारी के चरण में हैं। मंत्रालय ने कहा कि इस समय किसी संभावित रक्षा समझौते या ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात जैसे विषयों पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 8 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की प्रस्तावित यात्रा से पहले आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में दी गई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इंडोनेशिया भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार, संपर्क और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर लगातार संवाद जारी है और प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

विदेश मंत्रालय के पूर्वी सचिव रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है, लेकिन रक्षा सहयोग से जुड़े कई प्रस्ताव अभी विचार-विमर्श और तैयारी के चरण में हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ब्रह्मोस मिसाइल या अन्य रक्षा परियोजनाओं से संबंधित किसी भी संभावित समझौते पर आधिकारिक घोषणा उचित समय पर ही की जाएगी। भारत पिछले कुछ वर्षों से अपने स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने और रक्षा निर्यात का विस्तार करने की दिशा में सक्रिय है, जिसके चलते कई मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को नई गति मिली है।

वहीं, विदेश मंत्रालय ने ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम आपूर्ति को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। संयुक्त सचिव (ओशिनिया) विश्वेश नेगी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच असैन्य परमाणु सहयोग का समझौता पहले से लागू है, लेकिन यूरेनियम आपूर्ति की प्रक्रिया अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में इस विषय पर दोनों देशों के बीच सार्थक बातचीत हुई है और उम्मीद है कि यह जल्द किसी ठोस और व्यावहारिक निष्कर्ष तक पहुंचेगी। यदि ऑस्ट्रेलिया से नियमित यूरेनियम आपूर्ति शुरू होती है तो इससे भारत के असैन्य परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी बल मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी तीन देशों की यात्रा को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान इंडोनेशिया के साथ रक्षा एवं समुद्री सहयोग, ऑस्ट्रेलिया के साथ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, व्यापार और प्रौद्योगिकी साझेदारी तथा न्यूजीलैंड के साथ आर्थिक एवं जन-संपर्क संबंधों को नई गति देने पर विशेष जोर रहेगा। विदेश मंत्रालय का मानना है कि यह दौरा भारत के क्षेत्रीय और वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक हितों को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा।

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