पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में प्रदर्शन तेज, LoC के दोनों ओर अभियान का ऐलान

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यह घटनाक्रम पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है, जहां आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठनों ने दावा किया है कि अब उनका अभियान नियंत्रण रेखा (LoC) के दोनों ओर रहने वाले लोगों तक पहुंचाया जाएगा। आंदोलनकारी नेताओं ने भारत के जम्मू-कश्मीर, पुंछ, राजौरी, कश्मीर घाटी और लद्दाख के लोगों से भी शांतिपूर्ण तरीके से इस अभियान के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों, न्याय और कथित दमन के खिलाफ चलाया जा रहा है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रही जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) का आरोप है कि पाकिस्तान प्रशासन ने हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। संगठन के अनुसार, कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई और आम नागरिकों पर दबाव बनाया गया। आंदोलनकारियों का दावा है कि पीओके में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है और विरोध की आवाज को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की जा रही है। इसी के विरोध में संगठन ने नियंत्रण रेखा के दोनों ओर प्रतीकात्मक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मुद्दे पर ध्यान देने और मानवाधिकारों से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

पीओके में पिछले कुछ महीनों से महंगाई, बिजली संकट, कर व्यवस्था, प्रशासनिक नीतियों और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर लगातार असंतोष देखा जा रहा है। विभिन्न शहरों में समय-समय पर हुए प्रदर्शनों में स्थानीय संगठनों ने पाकिस्तान सरकार पर जनता की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। मौजूदा आंदोलन को उसी असंतोष की अगली कड़ी माना जा रहा है, जिसमें अब व्यापक जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है।

दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांति कायम रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं तथा किसी भी प्रकार की हिंसा या अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं आंदोलनकारी संगठन अपने अभियान को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताते हुए इसे नागरिक अधिकारों की लड़ाई करार दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंदोलन आगे और व्यापक होता है तथा नियंत्रण रेखा के दोनों ओर समर्थन जुटाने में सफल रहता है, तो इसका क्षेत्रीय राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर भारत और पाकिस्तान दोनों की सुरक्षा एजेंसियां नजर बनाए हुए हैं, जबकि भारत की ओर से इस अपील पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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