दुनिया अनिश्चितता के दौर में, भारत समाधान का हिस्सा: ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी का संबोधन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया बिजनेस एवं सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं और ऊर्जा संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में ऊर्जा सुरक्षा केवल किसी एक देश का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता और विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने दूरदर्शी नीतियों, ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा संकट के प्रभाव को अपने नागरिकों पर न्यूनतम रखने का प्रयास किया है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, सौर एवं पवन ऊर्जा तथा क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी भविष्य की वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उनका कहना था कि भारत तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ हरित तकनीकों और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर एक सुरक्षित, टिकाऊ और विश्वसनीय वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने में अहम योगदान देंगे।

प्रधानमंत्री ने निवेशकों को भारत में सेमीकंडक्टर, रक्षा विनिर्माण, डिजिटल प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सरकार निवेशकों के लिए पारदर्शी, स्थिर तथा अनुकूल कारोबारी माहौल उपलब्ध कराने के लिए लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन का नेतृत्व करना भी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत और ऑस्ट्रेलिया के व्यापक रणनीतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा, कौशल विकास, महत्वपूर्ण खनिजों, यूरेनियम आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देश मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं और यह साझेदारी आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी।

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय की भी सराहना करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक सेतु का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा, सूचना प्रौद्योगिकी, व्यापार और सार्वजनिक जीवन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देकर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय समुदाय दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा तीन देशों के दौरे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान उनकी प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ द्विपक्षीय वार्ता के अलावा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और भारतीय समुदाय से भी मुलाकात का कार्यक्रम है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों और नई साझेदारियों को आगे बढ़ाने पर सहमति बन सकती है, जिससे भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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