संसद के आगामी सत्र और देश के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों पर रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के नई दिल्ली स्थित आवास पर पार्टी के शीर्ष नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान सबसे अहम फैसला प्रस्तावित परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल को लेकर लिया गया। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार संसद में परिसीमन से संबंधित कोई विधेयक लाती है तो पार्टी उसका विरोध करेगी और इस मुद्दे पर INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ मिलकर साझा रणनीति अपनाएगी।
बैठक में नेताओं ने कहा कि परिसीमन केवल लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और देश के संघीय ढांचे से भी है। कांग्रेस का मानना है कि इस तरह के किसी भी बड़े फैसले से पहले सभी राज्यों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और व्यापक राष्ट्रीय सहमति बनाई जानी चाहिए। पार्टी ने संकेत दिया कि वह संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी तथा सहयोगी दलों के साथ समन्वय बनाकर सरकार को घेरने का प्रयास करेगी।
बैठक में परिसीमन के अलावा संसद के आगामी सत्र के एजेंडे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी, किसानों से जुड़े मुद्दे, आर्थिक स्थिति, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, विभिन्न राज्यों की कानून-व्यवस्था और अन्य जनहित के विषयों को संसद में प्रमुखता से उठाने की रणनीति बनाई। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल और साझा रुख अपनाकर ही सरकार को प्रभावी ढंग से जवाबदेह बनाया जा सकता है।
बैठक में INDIA गठबंधन की एकजुटता को और मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल किसी एक मुद्दे का विरोध करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, राज्यों के अधिकारों और जनहित से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि परिसीमन का मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हो सकता है और संसद के आगामी सत्र में इस पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।




