जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों ने अपनी रणनीति को और अधिक आक्रामक बना दिया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने घाटी के दुर्गम पर्वतीय इलाकों में आतंकियों के खिलाफ अभियान को तेज करते हुए अपने टेम्परेरी ऑपरेटिंग बेस (TOBs) की संख्या बढ़ाकर 55 कर दी है। ये बेस समुद्र तल से लगभग 8,000 से 10,000 फीट की ऊंचाई वाले उन क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं, जहां विदेशी आतंकवादी लंबे समय से अपने ठिकाने बनाकर सुरक्षा बलों से बचने की कोशिश करते रहे हैं। इस नई रणनीति का उद्देश्य आतंकियों की आवाजाही पर लगातार निगरानी रखना, घुसपैठ के मार्गों को बंद करना और ऊंचाई वाले इलाकों में उनकी सुरक्षित पनाहगाहों को खत्म करना है।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पहलगाम आतंकी हमले के बाद घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियानों की समीक्षा की गई, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी केवल आबादी वाले क्षेत्रों तक सीमित न रहकर ऊंचे पर्वतीय इलाकों तक भी लगातार बनी रहे। इसी रणनीति के तहत नए ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए गए हैं, जहां से जवान चौबीसों घंटे गश्त, निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। इससे आतंकियों के लिए पहाड़ों में लंबे समय तक छिपे रहना और रसद जुटाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है।
सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त अभियान चलाकर आतंकियों के ठिकानों को लगातार ध्वस्त कर रही हैं। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के सवजियां वन क्षेत्र में एक आतंकी ठिकाने का भंडाफोड़ किया गया, जहां से भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया। सुरक्षा बलों ने पूरे ठिकाने को मौके पर ही नष्ट कर दिया और क्षेत्र में तलाशी अभियान को और तेज कर दिया। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे अभियान आतंकियों के नेटवर्क को कमजोर करने और उनकी आपूर्ति व्यवस्था को बाधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचाई वाले इलाकों में बनाए गए ये ऑपरेटिंग बेस केवल अस्थायी शिविर नहीं हैं, बल्कि आतंकवाद विरोधी अभियान की नई रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन बेस के माध्यम से सुरक्षा बल तेजी से किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कार्रवाई कर सकते हैं, जंगलों और पहाड़ियों में लगातार निगरानी बनाए रख सकते हैं तथा घुसपैठ के प्रयासों को शुरुआती चरण में ही विफल कर सकते हैं। इससे विदेशी आतंकवादियों के लिए घाटी में सक्रिय रहना और स्थानीय नेटवर्क के सहारे लंबे समय तक टिके रहना और भी मुश्किल होगा।
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आने वाले समय में तकनीकी निगरानी, खुफिया तंत्र और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थायी उपस्थिति के संयोजन से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। सुरक्षा बलों का लक्ष्य केवल आतंकियों को निष्क्रिय करना ही नहीं, बल्कि उनके ठिकानों, रसद मार्गों और घुसपैठ के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर घाटी में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।




