भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच भारतीय वायुसेना (IAF) एक बार फिर अपनी आधुनिक युद्ध क्षमता का प्रदर्शन करने जा रही है। भारतीय वायुसेना का दल ऑस्ट्रेलिया पहुंच चुका है, जहां वह 20 जुलाई से 7 अगस्त तक आयोजित होने वाले बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘एक्सरसाइज पिच ब्लैक 2026’ में हिस्सा लेगा। इस प्रतिष्ठित सैन्य अभ्यास में 19 देशों की वायु सेनाएं और 100 से अधिक सैन्य विमान भाग लेंगे। इस बार भारतीय वायुसेना के लिए यह अभ्यास इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार उसके अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान इस युद्धाभ्यास का हिस्सा बनेंगे।
भारतीय दल में चार राफेल लड़ाकू विमान, दो C-17 ग्लोबमास्टर रणनीतिक परिवहन विमान और 120 से अधिक वायुयोद्धा शामिल हैं। यह दल ऑस्ट्रेलिया के डार्विन एयरबेस पर तैनात रहेगा और विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के साथ जटिल युद्ध परिस्थितियों पर आधारित अभ्यास करेगा। युद्धाभ्यास के दौरान हवाई हमले, एयर-टू-एयर कॉम्बैट, संयुक्त मिशन, रात में उड़ान, सामरिक समन्वय और बहुराष्ट्रीय ऑपरेशन जैसे कई चुनौतीपूर्ण परिदृश्यों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, संचालन क्षमता और युद्धक दक्षता को मजबूत करना है।
‘पिच ब्लैक’ रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF) का प्रमुख द्विवार्षिक (Biennial) सैन्य अभ्यास है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1981 में हुई थी। समय के साथ यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यासों में शामिल हो गया है। इस अभ्यास का नाम ‘पिच ब्लैक’ इसलिए रखा गया क्योंकि शुरुआती वर्षों में इसका मुख्य फोकस रात के समय कम रोशनी वाली परिस्थितियों में युद्ध संचालन का अभ्यास करना था। आज यह अभ्यास वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में आधुनिक हवाई अभियानों की तैयारी का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
भारतीय वायुसेना के लिए यह अभ्यास कई मायनों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को विभिन्न देशों के आधुनिक फाइटर जेट्स के साथ उड़ाने से भारतीय पायलटों को नई युद्ध तकनीकों, सामरिक रणनीतियों और संयुक्त अभियानों का अनुभव मिलेगा। इसके अलावा यह अभ्यास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को भी मजबूती देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बहुराष्ट्रीय अभ्यास भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारी बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य की संयुक्त सैन्य चुनौतियों से निपटने की क्षमता को भी मजबूत करते हैं।
भारत पहले भी ‘पिच ब्लैक’ अभ्यास में हिस्सा ले चुका है, लेकिन इस बार राफेल विमानों की पहली भागीदारी इसे विशेष बना रही है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार राफेल की उन्नत रडार प्रणाली, लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता और नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना की ताकत को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगी। इसके साथ ही यह भागीदारी भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों तथा मुक्त और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।




