नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए संसद की गरिमा, लोकतांत्रिक परंपराओं और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि मानसून सत्र को टकराव के बजाय संवाद और सकारात्मक सहयोग का मंच बनाया जाए, ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर प्रभावी निर्णय लिए जा सकें। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद की उत्पादकता का सीधा संबंध देश के विकास और जनता की आकांक्षाओं से है।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं की उपलब्धियों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि आज 28 वर्ष के युवा खेल, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, नवाचार और अन्य क्षेत्रों में भारत का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की प्रतिभा और मेहनत भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है तथा यही युवा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे हैं। इसी क्रम में उन्होंने कहा, “56 नहीं, 28 साल के नौजवान देश का मान बढ़ा रहे हैं।” राजनीतिक हलकों में इस टिप्पणी को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर परोक्ष तंज के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में किसी विपक्षी नेता का नाम नहीं लिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया आज भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, लोकतांत्रिक व्यवस्था और युवाओं की क्षमता को नए विश्वास के साथ देख रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के युवाओं की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। उनके अनुसार सरकार का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिसमें युवाओं को शिक्षा, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार के अधिक अवसर मिल सकें तथा वे वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
आगामी मानसून सत्र को कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों के कारण अहम माना जा रहा है। सरकार जहां विभिन्न विधायी प्रस्तावों को सदन में लाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी कई राजनीतिक और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में महत्वपूर्ण बहस, चर्चा और राजनीतिक टकराव की संभावना बनी हुई है। प्रधानमंत्री ने अंत में सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और संसद को जनविश्वास तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप प्रभावी ढंग से संचालित करने में अपना योगदान दें।




