अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब और गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ईरान के खिलाफ अभियान में मिसाइल और ड्रोन क्षमता, वायु रक्षा प्रणालियों तथा तटीय निगरानी से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। लगातार बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है और कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में बाधा से पूरी दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने शिपिंग कंपनियों और ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। पहले भी इस क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमलों और जहाजों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आ चुकी हैं।
अमेरिका का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल समुद्री यातायात और वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ किया जा सकता है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अभियान के दौरान ईरान के कमांड सेंटरों, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं तथा तटीय निगरानी ढांचे को निशाना बनाया गया है। वॉशिंगटन का तर्क है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों और नागरिकों पर हमलों की क्षमता को कम करना है। हालांकि, ईरान इन हमलों को अमेरिकी आक्रामकता बता रहा है और इसके जवाब में क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों तथा सहयोगी देशों से जुड़े लक्ष्यों पर कार्रवाई की चेतावनी देता रहा है।
इस बीच संघर्ष का दायरा होर्मुज से आगे बढ़कर लाल सागर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर हमले किए हैं। इससे ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक साथ दो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर खतरा पैदा हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर क्षेत्र में समुद्री यातायात बाधित रहता है तो जहाजों को लंबे वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं। इससे परिवहन लागत, बीमा प्रीमियम और ऊर्जा की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती हमलों के बाद ईरान को कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है और कहा है कि इस तरह के हमलों के लिए ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
तेल बाजार पर इस बढ़ते तनाव का तत्काल असर देखने को मिला है। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। बाजार में यह आशंका बढ़ रही है कि यदि संघर्ष और लंबा खिंचता है या होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है तो वैश्विक आपूर्ति में बड़ा व्यवधान पैदा हो सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन, उत्पादन, उर्वरक, रसायन और कई अन्य क्षेत्रों की लागत पर भी पड़ता है। इस वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं महंगाई के नए दबाव का सामना कर सकती हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता लगातार बढ़ रही है। पिछले दिनों इस क्षेत्र में तेल टैंकरों को मिसाइल हमलों से नुकसान पहुंचने और चालक दल के सदस्यों के हताहत होने की खबरें सामने आई थीं। एक घटना में भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत और कई अन्य लोगों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई थी। ऐसी घटनाओं के बाद समुद्री कंपनियों के लिए इस मार्ग से गुजरना अधिक जोखिमपूर्ण हो गया है। सुरक्षा जोखिम बढ़ने के साथ जहाजों के बीमा खर्च और माल ढुलाई की लागत में भी वृद्धि हो सकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का राजनीतिक और कूटनीतिक असर भी व्यापक हो रहा है। दोनों पक्षों के बीच पहले बातचीत और तनाव कम करने की कोशिशों की खबरें सामने आई थीं, लेकिन समुद्री मार्गों और सैन्य हमलों को लेकर बढ़ते विवाद ने स्थिति को फिर से गंभीर बना दिया है। अमेरिका ईरान पर समुद्री यातायात को खतरे में डालने का आरोप लगा रहा है, जबकि ईरान अमेरिकी हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता की मुख्य वजह बता रहा है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और जवाबी कार्रवाई के कारण संघर्ष के और फैलने का खतरा बना हुआ है।
विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि क्या संघर्ष केवल अमेरिका और ईरान के बीच सीमित रहेगा या फिर इसमें क्षेत्र के अन्य देश और सशस्त्र समूह भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगे। लाल सागर में हूती हमलों और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। यदि समुद्री मार्गों पर हमले बढ़ते हैं तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, सैन्य टकराव के लंबे समय तक जारी रहने से पश्चिम एशिया में व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका भी बढ़ सकती है।
फिलहाल अमेरिका की ओर से ईरान पर लगातार 13वीं रात हमले और होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया का ध्यान इस संकट की ओर खींच दिया है। एक तरफ सैन्य कार्रवाई लगातार तेज हो रही है, तो दूसरी तरफ तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। यदि संघर्ष जल्द नियंत्रित नहीं हुआ और होर्मुज तथा लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर व्यवधान जारी रहा, तो आने वाले दिनों में ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक महंगाई पर इसका और गंभीर असर पड़ सकता है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव आगे किस दिशा में जाता है और क्या कूटनीतिक प्रयास सैन्य तनाव को रोकने में सफल हो पाते हैं।




